
IAS रिंकू सिंह राही का इस्तीफा; नाराज अफसर ने छोड़ी सेवा, संघर्षों से भरा रहा करियर
IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने काम न मिलने से नाराज होकर मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। इस मामले में उनके पिता ने कहा कि उनके बेटे को काम नहीं दिया जा रहा था, जबकि वह देशभक्त, ईमानदार और मेहनती अधिकारी हैं।
उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा रही थी और बिना काम के बैठाकर रखा गया था। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजते हुए PCS सेवा में वापस भेजने की भी मांग की है। उनका मुख्य आरोप यही है कि उन्हें “अटैच” (Attached) रखा गया था, यानी वेतन मिल रहा था पर कोई ठोस काम या जिम्मेदारी नहीं दी गई थी।
काम न मिलने से नाराज होकर दिया इस्तीफा
सूत्रों के मुताबिक रिंकू सिंह राही पिछले कई महीनों से बिना किसी अहम पोस्टिंग के थे। उनका कहना है कि उन्हें न तो कोई विभाग दिया गया और न ही प्रशासनिक जिम्मेदारी। इस स्थिति से नाराज होकर उन्होंने सेवा छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने यह भी कहा कि बिना काम के वेतन लेना उन्हें स्वीकार नहीं था।
व्हिसलब्लोअर अफसर के रूप में बनी पहचान
रिंकू सिंह राही की पहचान एक ईमानदार और सिस्टम से टकराने वाले अधिकारी की रही है। PCS अधिकारी रहते हुए उन्होंने समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा किया था। इस मामले के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें उन्हें कई गोलियां लगीं। इस हमले में वे गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन उन्होंने जांच जारी रखी। इसी घटना के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए।

संघर्ष के बाद बने IAS
हमले के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और बाद में UPSC परीक्षा पास कर IAS बने। उत्तर प्रदेश कैडर मिलने के बाद उनकी विभिन्न पदों पर तैनाती हुई। हालांकि उनके कार्यकाल के दौरान कई विवाद भी सामने आए, जिनमें एक मामला वायरल वीडियो से जुड़ा था। इसके बाद उन्हें हटाकर बिना अहम जिम्मेदारी के रखा गया था।
लंबे समय से नहीं मिली सक्रिय पोस्टिंग
बताया जा रहा है कि पिछले करीब 7–8 महीनों से उन्हें कोई सक्रिय प्रशासनिक काम नहीं दिया गया था। इसी को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई और अंततः इस्तीफा दे दिया।
चर्चा में आया फैसला
रिंकू सिंह राही का इस्तीफा प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ इसे सिस्टम से असंतोष का संकेत माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थक इसे “ईमानदार अधिकारी की नाराजगी” बता रहे हैं।
अब देखना होगा कि सरकार उनके इस्तीफे पर क्या फैसला लेती है और क्या उन्हें दोबारा किसी भूमिका में लाया जाता है या नहीं।





