
Lucknow News: चाइनीज मांझे का कहर; राजस्व निरीक्षक का कट गया कान
Lucknow News: लखनऊ में चाइनीज मांझे की चपेट में आने से दो लोग बुरी तरह जख्मी हो गए। राजस्व निरीक्षक का कान कट गया। वहीं मलिहाबाद में बीजेपी कार्यकर्ता का गला कट गया। दोनों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
Lucknow News: लखनऊ में पतंगबाजी का खतरनाक रूप एक बार फिर सामने आया है। नगर निगम जोन-8 में तैनात राजस्व निरीक्षक राजा भइया रविवार को ड्यूटी के दौरान चाइनीज मांझे की चपेट में आकर घायल हो गए। वह जोन-8 कार्यालय से लालबाग स्थित मुख्यालय फाइल लेकर जा रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज मांझा उनके कान में उलझ गया, जिससे उनका कान कट गया। वहीं, मलिहाबाद में बाइक सवार बीजेपी कार्यकर्ता की गर्दन मांझे से कट गई, जिससे वह सड़क पर गिरकर घायल हो गए।
चाइनीज मांझे से राजस्व निरीक्षक का कान कटा
हजरतगंज में घायल हुए राजा भइया के अनुसार, रविवार शाम वह नगर निगम जोन-8 कार्यालय से लालबाग स्थित नगर निगम मुख्यालय फाइल लेकर बाइक से जा रहे थे। इसी बीच एनेक्सी भवन के पास अचानक हवा में लटक रहे पतंग के चाइनीज मांझे की चपेट में आ गए। मांझा उनके कान में फंस गया। खिंचाव से उनके दाहिने कान का ऊपरी हिस्सा कट गया। रगड़ माथे पर भी लगी, हालांकि आंख बाल-बाल बच गई। घटना के दौरान बाइक अनियंत्रित हो गई। वह गिरते-गिरते बचे। किसी तरह बाइक रोकी। कान से लेकर शर्ट तक खून से लथपथ हो चुकी थी।
मलिहाबाद में भाजपा कार्यकर्ता घायल
वहीं मलिहाबाद के सहिलामऊ में रविवार शाम को चाइनीज मांझे से बाइक सवार भाजपा कार्यकर्ता की गर्दन कट गई। इससे बाइक बेकाबू हो गई और भाजपा कार्यकर्ता साथी के साथ सड़क पर जा गिरा। यह देख लोगों की भीड़ लग गई। लहुलुहान युवक को साथी ने अस्पताल पहुंचाया।
यूपी में बैन है चाइनीज मांझा
यूपी में चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बाद भी इसकी बिक्री हो रही है। भारत में सामान्य धागे से पतंग की डोर तैयार होती है, लेकिन चीन में नायलॉन के साथ मेटलिक पाउडर का उपयोग होता है। इसमें कांच और लोहे के चूरे को भी मिलाया जाता है ताकि धार और तेज हो।
नायलॉन के धागे के कारण पेच लड़ने पर खिंचाव बढ़ता है और चाइनीज मांझा कटता नहीं है। कांच और लोहे का चूर्ण मिला यह मांझा गला रेतने के लिए पर्याप्त होता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चाइनीज मांझे की खरीद-बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त रुख अपनाया। 10 फरवरी, 2026 को सुनवाई में कोर्ट ने कहा था- इसे रोकने के लिए केवल शासनादेश पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानूनी प्रावधान बनाने होंगे।





