
मंच पर ही फूट-फूट कर रोए डिप्टी CM, संघर्ष के दिनों को याद कर आंखों से निकले आंसू
Brajesh Pathak in Meerut: यूपी की योगी सरकार में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक अपने बीतों दिनों को याद कर मंच पर ही फफक कर रो पड़े। मेरठ में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर आयोजित कार्यक्र में यह वाक्या देख हर कोई हैरान रह गया।
Brajesh Pathak in Meerut: उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के फफक-फफक कर रोने का मामला सामने आया है। दरअसल, डिप्टी सीएम गुरुवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती की पूर्व संध्या पर मेरठ के पीएल शर्मा स्मारक सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन में पहुंचे थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने जैसे ही अपने संघर्ष के दिनों को याद किया, वे भावुक हो गए। संबोधन के दौरान डिप्टी सीएम मंच पर ही फफक-फफक कर रोने लगे। अब यह मामला खूब चर्चा में है।
जब लखनऊ आए, तब पैर में चप्पल तक नहीं थे
ब्रजेश पाठक ने बताया कि जब वह पहली बार लखनऊ आए थे। तब उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। कड़ाके की ठंड में उनके पास पहनने के लिए जूते तक नहीं थे। गर्मी में चप्पल और सर्दी में जूते का इंतजाम कर पाना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने गरीबी को बहुत करीब से देखा और जिया है, इसलिए आज भी जब सड़क पर किसी गरीब को दुखी देखता हूं, तो मन व्यथित हो जाता है।
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▶️यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मंच पर भावुक होकर रो पड़े
▶️मेरठ में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती कार्यक्रम के दौरान भावुक क्षण
▶️अपने बीते संघर्ष और पुराने दिनों को याद करते हुए छलके आंसू
▶️मंच से बोलते-बोलते खुद को संभाल नहीं पाए डिप्टी सीएम
▶️घटना का वीडियो… pic.twitter.com/4XdWRh4La7— Live New India (@livenewindia01) January 23, 2026
डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि वह खुद को किसी बड़े पद पर बैठा व्यक्ति नहीं, बल्कि गरीबों की सेवा करने वाला इंसान मानते हैं। उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें खाना बनाना भी नहीं आता था। आटा गूंथते समय कभी आटा ज्यादा हो जाता था। तो कभी पानी। कई बार जरूरत से ज्यादा आटा बन जाता था। जबकि खाने वाला केवल एक ही व्यक्ति होता था।
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मां ने मिट्टी के तेल वाला दिया था स्टोव
उन्होंने बताया कि उनकी मां ने उन्हें मिट्टी के तेल वाला एक स्टोव दिया था। जिस पर लखनऊ में रहते हुए वह अपनी रोटियां पकाते थे। इन अनुभवों ने उन्हें जीवन की सच्चाई सिखाई। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि जीवन में हालात बदलते रहते हैं, लेकिन देश और तिरंगे के सम्मान के लिए किया गया योगदान हमेशा याद रखा जाता है।
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