
पृथ्वी पर अब नही रहे ‘धरतीपकड़’
राष्ट्रपति चुनावों में बारंबार नामांकन करने पर हुए चर्चित
अंतरराष्ट्रीय चुनावों में भी किया था नामांकन
भागलपुर। भारतीय राजनीति में ‘धरतीपकड़’ (Dharti Pakar) उन प्रत्याशियों को दिया गया एक प्रसिद्ध उपनाम (Sobriquet) है जो बिना हार माने बार-बार और लगातार चुनाव लड़ते रहते हैं, भले ही हर बार उनकी जमानत जब्त हो जाए। यह शब्द चुनावी राजनीति के उन जीवट किरदारों का प्रतीक है। जो हार-जीत की परवाह किए बिना लोकतंत्र के उत्सव में हिस्सा लेते हैं।
96 वर्ष की आयु में पृथ्वी से जुदा हुए अनोखे ‘धरतीपकड़’
भागलपुर के रहने वाले नागरमल बाजोरिया को लोग ‘धरतीपकड़’ के नाम से जानते हैं। वह देश के सर्वोच्च पद के लिए चुनाव लड़ चुके थे। भारत के हर निर्वाचन में एक समय वह जरूर खड़े होते थे। कुछ अंतरराष्ट्रीय चुनावों में भी उन्होंने नामांकन किया था, जहां भारतीय पर्चा दाखिल कर सकते थे। नागरमल बाजोरिया ने चुनाव लड़ने में न कभी अपना दायरा देखा और न ही जमानत राशि की चिंता की। समाज की बात करने के कारण सोशल मीडिया के जमाने से पहले के ‘धरतीपकड़’ को हर मीडिया उनके नाम से जानता था। हर राज्य में उनके नाम की चर्चा होती थी।नागरमल बाजोरिया ‘धरतीपकड़’ ने ग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रपति पद तक के 284 चुनाव लड़े, लेकिन जीते कभी नही थे। वह कई प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों के खिलाफ भी चुनावी मैदान में उतरे। चुनाव प्रचार के लिए वे अनोखे तरीके (जैसे गधों का इस्तेमाल) अपनाते थे। भारत ही नहीं, दुनिया में वह अकेले शख्स थे। प्रसिद्ध नाम था- ‘धरतीपकड़’। मिलनसार और सबसे बड़ी बात कि बहुत रोचक। वह दुनिया के इकलौते शख्स थे, जिन्होंने 284 बार चुनावी मैदान में नामांकन किया और हर बार हारे। किसी हार से वह डरे नहीं। तभी तो राष्ट्रपति चुनावों में बार-बार नामांकन करने के कारण भी चर्चित हुए। जमानत जब्त कराने का भी रिकॉर्ड बनाया, लेकिन जब तक चलते-फिरते रहे, चुनाव में उतरते रहे।
नागरमल बाजोरिया का पार्थिव शरीर भागलपुर रवाना
धरतीपकड़’ नागरमल बाजोरिया ने गुरुवार को पटना में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर के बाद उनसे जुड़े लोगों में शोक की लहर है। उनका पार्थिव शरीर भागलपुर रवाना हो चुका है।तीन सितंबर 2026 को पटना के पीएमसीएच (PMCH) में 96 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया है। भारत ही नहीं, दुनिया में वह अकेले शख्स थे। प्रसिद्ध नाम था- ‘धरतीपकड़’। मिलनसार और सबसे बड़ी बात कि बहुत रोचक। वह दुनिया के इकलौते शख्स थे, जिन्होंने 284 बार चुनावी मैदान में नामांकन किया और हर बार हारे। किसी हार से वह डरे नहीं। तभी तो राष्ट्रपति चुनावों में बार-बार नामांकन करने के कारण भी चर्चित हुए। जमानत जब्त कराने का भी रिकॉर्ड बनाया, लेकिन जब तक चलते-फिरते रहे, चुनाव में उतरते रहे।





