नागचंद्रेश्वर मंदिर में करंट की अफवाह से भगदड़, 15 श्रद्धालु घायल

कतार में खड़े श्रद्धालुओं में मची अफरा-तफरी, घायलों को चरक अस्पताल भेजा गया

Nagchandreshwar Temple Stampede: उज्जैन: जिले  के नागचंद्रेश्वर मंदिर में करंट की अफवाह के बाद भगदड़ जैसी स्थिति, कई श्रद्धालु घायल.

उज्जैन के महाकाल मंदिर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में करंट फैलने की अफवाह के बाद भगदड़ मच गई। इसमें कतार में खड़े कई श्रद्धालु घायल हो गए, जिन्हे उपचार के लिए चरक अस्पताल ले जाया गया।

घायलों की संख्या 15 बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि महाकाल मंदिर के ऊपरी तल पर स्थित श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए लगी कतार में आज हरसिद्धि मंदिर चौराहे के समीप बैरिकेडिंग के अंदर डीपी के समीप करंट फैलने की अफवाह के बाद दर्शन के लिए कतार में खड़े लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

इस दौरान कुछ श्रद्धालु घायल हो गए। भगदड़ के दौरान बेरिकैड्स से टकराने के कारण एक श्रृद्धालु के पैरों में गंभीर चोट आई है। नागचंद्रेश्वर मंदिर और हरसिद्धि मंदिर आसपास होने के कारण दर्शन व्यवस्था के इसी मार्ग पर भीड़ का दबाव था। पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और कुछ समय बाद दर्शन व्यवस्था फिर से सुचारू कर दी गई।

 

नागपंचमी पर उमड़ता है आस्था का सैलाब:

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर अपने आप में अनूठा और रहस्यमयी धार्मिक स्थल है। महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर विराजमान भगवान नागचंद्रेश्वर के कपाट वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। कपाट खुलने के बाद भक्तों को करीब 24 घंटे तक भगवान के दर्शन का अवसर मिलता है। इसके बाद मंदिर के कपाट पुनः बंद कर दिए जाते हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा सात फनों वाले नाग के आसन पर विराजमान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह प्रतिमा अत्यंत प्राचीन है और इसका संबंध नागराज तक्षक से माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार नागराज तक्षक ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया। इसके बाद तक्षक ने भगवान शिव के सान्निध्य में रहने की इच्छा व्यक्त की। मान्यता है कि इसी कारण नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव नाग के आसन पर विराजमान हैं। मंदिर के वर्ष में केवल एक दिन खुलने को लेकर भी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है।

कहा जाता है कि नागराज तक्षक वर्षभर यहां तपस्या करते हैं और उनकी साधना में कोई व्यवधान न हो, इसलिए मंदिर के कपाट सामान्य दिनों में बंद रहते हैं। नागपंचमी के दिन ही श्रद्धालुओं को भगवान नागचंद्रेश्वर के दुर्लभ दर्शन प्राप्त होते हैं। महाकाल मंदिर की बहुमंजिला संरचना में सबसे नीचे भगवान महाकालेश्वर, उसके ऊपर ओंकारेश्वर और सबसे ऊपरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है।

नागपंचमी के अवसर पर देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं और दुर्लभ दर्शन कर भगवान नागचंद्रेश्वर से सुख, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं। वर्ष में एक बार खुलने वाले इस मंदिर के दर्शन को श्रद्धालु अत्यंत सौभाग्य और पुण्य का अवसर मानते हैं।

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