
भारत-कनाडा सुरक्षा सहयोग मजबूत करने के लिए एनएसए अजीत डोभाल की कनाडाई समकक्ष से बैठक
India-Canada Relations: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने 18 सितंबर को नई दिल्ली में अपनी कनाडाई समकक्ष नतालि जी. ड्रूइन से मुलाकात की। यह बैठक दोनों देशों के बीच नियमित द्विपक्षीय सुरक्षा संवाद का हिस्सा थी और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच जून 2025 के जी7 शिखर सम्मेलन में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाने का अवसर माना गया।
यह मुलाकात साफ संकेत देती है कि मुश्किल दौर के बाद अब भारतकनाडा रिश्ते एक नए चैप्टर की ओर बढ़ रहे हैं, जहां मतभेदों को किनारे रखकर साझा चुनौतियों पर साथ काम करने का इरादा है.
बैठक का उद्देश्य और चर्चा के मुद्दे
बैठक का प्रमुख उद्देश्य भारत-कनाडा द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूती प्रदान करना था। दोनों पक्षों ने निम्नलिखित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की:
- आतंकवाद विरोधी गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों से निपटने के उपाय।
- खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान और सुरक्षा सहयोग को और प्रभावी बनाने के तरीके।
- दोनों देशों के बीच मौजूदा संपर्क तंत्रों को मजबूत करना और भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्र खोजना।
बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार साझा किया और द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने पर सहमति जताई।
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विदेश कार्यालय परामर्श (AOC)
बैठक के अगले दिन, 19 सितंबर को नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श (AOC) आयोजित किया गया। भारतीय पक्ष का नेतृत्व सचिव (पूर्व) पी. कुमारन ने किया, जबकि कनाडाई पक्ष का नेतृत्व उप विदेश मंत्री डेविड मॉरिसन ने किया। इस परामर्श का उद्देश्य भारत-कनाडा संबंधों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना और द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार देना था।
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द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति और आगे की रणनीति
- दोनों पक्षों ने जून 2025 के बाद हुए सुधार और उच्चायुक्तों की वापसी का स्वागत किया।
- व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, नागरिक परमाणु, सुरक्षा व कानून प्रवर्तन, दुर्लभ खनिज, अंतरिक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कृषि समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संवाद तंत्र को पुनः सक्रिय करने पर सहमति बनी।
- बैठक ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।
विदेश मंत्रालय ने इस बैठक को भारत और कनाडा के बीच मजबूत, संतुलित और रचनात्मक साझेदारी को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया।
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