महाराष्ट्र में किसानों की हालत पर राजू शेट्टी का सरकार पर हमला, ‘हरा अकाल’ घोषित करने की मांग

Maharashtra News: पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष और प्रख्यात किसान नेता राजू शेट्टी ने महाराष्ट्र में किसानों की गंभीर स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस बार हुई अत्यधिक बारिश ने किसानों की जिंदगी और आजीविका दोनों को तहस-नहस कर दिया है। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई, किसानों के घर उजड़ गए और पशुधन की भी भारी क्षति हुई है। ऐसे हालात में सरकार को ‘हरा अकाल’ घोषित करना चाहिए और तुरंत राहत पैकेज जारी करना चाहिए।

110 फीसदी ज्यादा बारिश — सबूत साफ है
राजू शेट्टी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार खुद मान रही है कि इस बार 110 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। यह साफ संकेत है कि किसानों पर गहरा संकट टूटा है। उन्होंने कहा कि किसानों की खेती, जमीन और फसलें सब डूब गई हैं। यह प्राकृतिक आपदा है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इसे आपदा मानकर किसानों को राहत दे।”

भीख नहीं, हक चाहिए: राजू शेट्टी
शेट्टी ने मुख्यमंत्री फडणवीस की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हालिया मुलाकात पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री किसानों के मुद्दों पर प्रधानमंत्री से “भीख मांगने” गए थे, जबकि यह किसानों का अधिकार है।

“हम भी टैक्स देते हैं, महाराष्ट्र केंद्र को सबसे ज्यादा टैक्स देता है। यह मदद मांगना नहीं, बल्कि हमारा हक है,” उन्होंने जोर देकर कहा।

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उद्धव ठाकरे का भी सरकार पर हमला
इससे पहले शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी किसानों की बदहाल स्थिति पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा था। ठाकरे ने कहा था कि पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल ऐसे ही संकट के समय के लिए होना चाहिए और किसानों की मदद के लिए तुरंत धन आवंटित किया जाना चाहिए।

उन्होंने सरकार की कर्जमाफी नीति पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या सरकार किसानों को कर्जमाफी देने के लिए पंचांग देखेगी? अगर बारिशग्रस्त किसानों की मदद के लिए पंचांग में कोई शुभ मुहूर्त है, तो मैं उसकी कॉपी मुख्यमंत्री, अमित शाह और प्रधानमंत्री को भेज दूंगा।”

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किसानों की बढ़ती चिंता
लगातार बेमौसम बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के चलते महाराष्ट्र में किसानों का संकट गहराता जा रहा है। खेतों में बोई गई सोयाबीन, कपास, गन्ना और धान की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। कई किसानों के घर पानी में बह गए हैं, वहीं पशुधन की भारी क्षति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गहरी चोट लगी है।

किसान संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार हरा अकाल घोषित कर मुआवजे और पुनर्वास की ठोस योजना नहीं बनाती, तब तक हालात सामान्य नहीं हो पाएंगे।

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के किसानों की हालत पर यह मुद्दा अब तेजी से राजनीतिक रंग भी लेने लगा है और आने वाले दिनों में सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है।

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