कफ सिरप से 1 और बच्चे की मौत का दावा, मेडिकल विभाग ने दी सफाई

Rajasthan Cough Syrup Case: भरतपुर जिले के वैर क्षेत्र में 2 साल के बच्चे की मौत ने डेक्सट्रोमेथॉरफन सिरप को विवादों में ला दिया है। परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल से मिली खांसी की दवा से ही बच्चे की मौत हुई, जबकि चिकित्सा विभाग ने इसे नकार दिया।

Rajasthan Cough Syrup Case: राजस्थान में सरकारी अस्पताल की मुफ्त दवाई योजना के तहत मिलने वाली खांसी सिरप से बच्चों की हालत बिगड़ने और मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. सीकर और भरतपुर में पहले हुए मामलों के बाद अब भरतपुर जिले के वैर क्षेत्र में 2 साल के बच्चे की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल से दी गई खांसी सिरप पीने के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ी और जयपुर के जेके लोन अस्पताल में उसकी मौत हो गई। विभाग का कहना है कि मौत का कारण डेक्सट्रोमेथॉरफन नहीं है. सीकर में एक मामले में डॉक्टर और फार्मासिस्ट निलंबित किए गए हैं।

अस्पताल में हुई बच्चे की मौत

स्थिति गंभीर होने पर बच्चे को वैर उपजिला अस्पताल ले जाया गया और फिर भरतपुर अस्पताल रेफर किया गया. हालत में सुधार न होने पर 24 सितंबर की शाम को उसे जयपुर के जेके लोन अस्पताल भेजा गया, जहां 27 सितंबर की सुबह डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया.वैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. बीपी शर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि बच्चे को एंटीबायोटिक टैबलेट और खांसी सिरप दी गई थी. मीडिया में आए समाचारों के बाद इस सिरप का वितरण रोक दिया गया है और मामले की जांच जारी है।

सीकर में बच्चे को नहीं दी गई थी डेक्सट्रोमेथॉरफन सिरप

सीकर के सीएमएचओ डॉ. अशोक महरिया ने 29 सितंबर को खोरी ब्राह्मणान गांव के बच्चे की मौत पर शोक जताते हुए कहा कि बच्चे को सीकर जिले के किसी सरकारी अस्पताल से डेक्सट्रोमेथॉरफन सिरप नहीं दी गई. संभवतः किसी बीमार परिजन को यह दवा मिली हो. आमजन से अपील है कि बिना चिकित्सक के परामर्श के कोई दवा न लें. डॉ. महरिया ने विभागीय लापरवाही पर सख्ती का संकेत दिया, जो सीकर के सस्पेंशन से साफ है।

वहीं विभाग ने प्रकरण में आवश्यक कार्यवाही के साथ ही एडवाइजरी भी जारी की है। यह एडवाइजरी प्रिस्क्रिप्शन लिखने में प्रोटोकॉल का पालन करने, मरीजों को प्रिसक्रिप्शन से ही दवा उपलब्ध कराने और मरीजों द्वारा बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवा नहीं लेने के संबंध में है। इसमें कहा गया है कि सभी चिकित्सक दवा लिखते समय परामर्श की पूर्णत: पालना सुनिश्चित करें। बच्चों को दवाई लिखते समय निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाए।

 

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