
विश्व कपास दिवस: गिरिराज सिंह ने किसानों की मेहनत और जलवायु चेतना पर दिया जोर
CITI: विश्व कपास दिवस के अवसर पर गिरिराज सिंह ने कपास किसानों को बधाई दी और कहा कि कपास केवल एक फसल नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि की आत्मा और किसानों के परिश्रम का प्रतीक है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री ने यह बात कपड़ा मंत्रालय और भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (CITI) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कही।
गिरिराज सिंह ने कहा कि कपास का प्रत्येक धागा हमारे किसानों की कहानी समेटे हुए है। यह चिलचिलाती धूप में उनकी कड़ी मेहनत, बारिश के लिए उनकी प्रार्थना और मिट्टी में उनके अटूट विश्वास की कहानी है।”
जलवायु परिवर्तन को बताया बड़ी चुनौती
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कपास क्षेत्र के सामने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को पानी और बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग करना होगा और प्रकृति की रक्षा के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने देते हुए कहा कि भारत के वर्षा-आधारित कपास क्षेत्रों की रक्षा और किसानों की मेहनत को भविष्य की समृद्धि में बदलने के लिए जल का कुशल उपयोग, मृदा संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना अत्यंत जरूरी है। उद्योग के सभी पक्षों से ‘एक परिवार’ की तरह काम करने की अपील
गिरिराज सिंह ने कहा कि परिवर्तन तभी संभव है जब किसान से लेकर कपड़ा निर्यातक तक, सभी हितधारक एक परिवार की तरह मिलकर काम करें।
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उत्पादकता बढ़ाने पर सरकार का फोकस
हालांकि भारत में विश्व के कुल कपास बुआई क्षेत्र का लगभग 40% हिस्सा है, लेकिन औसत उत्पादकता करीब 450 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ही है — जो अन्य देशों की तुलना में काफी कम है, जहां यह 2,000 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचती है। सरकार का लक्ष्य इस अंतर को पाटते हुए 2030 तक वस्त्र उद्योग का आकार 350 अरब डॉलर और निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाना है।
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किसानों के हित में कदम
गिरिराज सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि ने किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। उन्होंने कपास उत्पादकता मिशन को कृषि क्षेत्र में एक बड़े परिवर्तन की दिशा में कदम बताया।
केंद्रीय मंत्री का संदेश साफ था—कपास सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और देश की आर्थिक समृद्धि की डोर है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।
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