अमेरिका-चीन में टैरिफ सुलह… क्या भारत के लिए बढ़ेगी नई आर्थिक चुनौती?

US-China Deal: दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच वर्षों से चल रही ट्रेड वॉर को थामने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच साउथ कोरिया में दो घंटे लंबी मुलाकात के बाद अमेरिका ने चीन पर लगे टैरिफ में 10 प्रतिशत की कटौती की घोषणा कर दी।

यह कदम दोनों देशों के बीच तनाव घटाने और वैश्विक बाजार को स्थिरता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

“नई शुरुआत” की कोशिश
मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के प्रति सौहार्द दिखाते हुए बातचीत को “सकारात्मक और रचनात्मक” बताया।
ट्रंप ने चीन की संवेदनशील ताइवान नीति पर कोई टिप्पणी नहीं की — जिसे बीजिंग की “लाल रेखा” माना जाता है। इसके बदले चीन ने अमेरिका को रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) की आपूर्ति फिर से शुरू करने का भरोसा दिया, जो अमेरिकी रक्षा और तकनीकी उद्योगों के लिए बेहद अहम हैं।

विशेष बात यह भी रही कि रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी दोनों देशों ने सहयोग की बात की। ट्रंप ने कहा अमेरिका और चीन अब वैश्विक स्थिरता और शांति के लिए मिलकर काम करेंगे। हमें संघर्ष नहीं, समाधान की दिशा में बढ़ना है।”

विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान अमेरिका-चीन की नजदीकी का संकेत है, लेकिन रूस-चीन की पुरानी दोस्ती इस समझौते की अगली परीक्षा होगी।

ट्रंप का ऐलान: “टैरिफ में 10 प्रतिशत की कटौती”
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चीन पर अब कुल टैरिफ 57 प्रतिशत से घटाकर 47 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि फेंटानिल (Fentanyl) जैसी दवाओं पर लगाया गया टैरिफ 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है।

ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों ने एक साल के व्यापार समझौते (Trade Agreement) पर सहमति बनाई है, जिसे हर वर्ष समीक्षा कर आगे बढ़ाया जाएगा चीन की ओर से शी जिनपिंग ने कहा कि “बीजिंग अमेरिका के साथ निष्पक्ष और पारस्परिक लाभ वाले व्यापार संबंधों को प्राथमिकता देगा।”

चीन की रजामंदी: रेयर अर्थ और सोयाबीन डील
बैठक के दौरान चीन ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में सोयाबीन खरीदने का वादा किया। यह अमेरिकी कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि ट्रेड वॉर के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
साथ ही चीन ने Rare Earth Elements की आपूर्ति जारी रखने की घोषणा की — ये तत्व अमेरिकी रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन-टेक उद्योगों के लिए अनिवार्य हैं।

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व्यापार असंतुलन और तकनीकी तनाव

  • अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से ट्रेड बैलेंस (Trade Imbalance) चिंता का विषय है।
  • अमेरिका को चीन से सस्ता सामान आयात करने के कारण भारी व्यापार घाटा झेलना पड़ता है।
  • इसके अलावा, अमेरिका ने हाल के वर्षों में चीन को उच्च-प्रौद्योगिकी वाले सेमीकंडक्टर और AI उपकरणों के निर्यात पर सख्ती बढ़ाई है, ताकि चीन की तकनीकी प्रगति पर अंकुश लगाया जा सके।

माना जा रहा है कि इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, टिकटॉक जैसे ऐप्स, और डेटा सुरक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा की।

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वैश्विक और भारतीय असर

  • वैश्विक बाजार में राहत

इस समझौते के बाद एशियाई और अमेरिकी बाजारों में तेजी देखी गई। डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ और तेल की कीमतों में हल्की गिरावट           आई।

  • भारत के लिए चुनौतियाँ

* अब अमेरिका-चीन व्यापारिक माहौल सुधरने से भारत के निर्यात को प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ सकती है।

* अमेरिकी टैरिफ चीन पर 47% रह गया है, जबकि भारत पर अब भी 50% है — इससे अमेरिकी बाजार में चीनी उत्पाद फिर से बढ़त ले             सकते हैं।

* अमेरिका और चीन के करीब आने से भारत की रणनीतिक भूमिका पर भी असर पड़ सकता है, खासकर जब भारत-अमेरिका व्यापार                  समझौता अभी तक लंबित है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक संकेत भी है। ट्रंप आगामी चुनावी सत्र में एक वैश्विक स्थिरता निर्माता की छवि बनाना चाहते हैं, जबकि शी जिनपिंग चीन की अर्थव्यवस्था में नया भरोसा पैदा करना चाहते हैं।

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