अमेरिका का वीजा नीति में एक और तुगलकी फरमान; मोटापा, डायबिटीज़… वालों को इनकार

US Visa New Policy: अमेरिका ने अपनी वीजा नीति (US Visa Policy) में एक अहम और विवादास्पद बदलाव किया है। नई गाइडलाइन के तहत अब वीजा अधिकारी आवेदकों की स्वास्थ्य स्थिति को भी वीजा देने या अस्वीकृत करने के फैसले में शामिल करेंगे। यानी अगर किसी व्यक्ति को मोटापा, डायबिटीज़, हृदय रोग, कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियां हैं, तो उसे अमेरिका का वीजा देने से इनकार किया जा सकता है।

क्या है नया नियम?
अमेरिकी विदेश विभाग की ताज़ा गाइडलाइन के अनुसार, वीजा अधिकारी अब यह भी जांचेंगे कि कोई विदेशी नागरिक अमेरिका में जाकर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं या सहायता योजनाओं पर बोझ तो नहीं बनेगा। अगर अधिकारी को यह आशंका होती है कि आवेदक या उसका परिवार भविष्य में अमेरिकी सार्वजनिक संसाधनों पर निर्भर हो सकता है, तो उसे “Public Charge” (सार्वजनिक बोझ) की श्रेणी में रखा जाएगा। इस स्थिति में वीजा रद्द या अस्वीकृत किया जा सकता है।

यह नियम सिर्फ मुख्य आवेदक पर ही नहीं, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों — जैसे बच्चों, बुजुर्ग माता-पिता या पति-पत्नी — पर भी लागू होगा।

किन बीमारियों पर होगी सख्त निगरानी?
नई नीति के तहत स्वास्थ्य जांच में खास तौर पर निम्न बीमारियों और स्थितियों को गंभीरता से देखा जाएगा:

  • मोटापा (Obesity)
  • हृदय रोग (Heart Disease)
  • डायबिटीज़ (Diabetes)
  • कैंसर (Cancer)
  • श्वसन संबंधी बीमारियां (Respiratory Disorders)
  • मेटाबॉलिक और न्यूरोलॉजिकल विकार
  • मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं (Mental Health Issues)

अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मोटापा अब एक प्रमुख जोखिम कारक माना जाएगा क्योंकि यह उच्च रक्तचाप, अस्थमा और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है।

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क्यों किया गया बदलाव?
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति की दिशा में एक और कदम है। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से ही अमेरिका ने आप्रवासन से जुड़ी नीतियों को धीरे-धीरे कड़ा करना शुरू किया था।

  • पहले शरणार्थियों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाए गए,
  • फिर एच-1बी (H-1B) और स्टूडेंट वीजा के नियमों में संशोधन किए गए,
  • अब स्वास्थ्य आधारित जांच को वीजा प्रक्रिया में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य देश में पहले से मौजूद स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर अतिरिक्त बोझ को कम करना है और सुनिश्चित करना है कि आने वाले विदेशी नागरिक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों।

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विदेशी नागरिकों पर प्रभाव
नई नीति लागू होने के बाद, अमेरिका जाने के इच्छुक लाखों विदेशी नागरिकों को अब सिर्फ वित्तीय दस्तावेज़ ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य रिपोर्ट भी दूतावास में जमा करनी पड़ सकती है। मेडिकल परीक्षणों में किसी गंभीर बीमारी के पाए जाने पर वीजा अस्वीकृत होने की संभावना बढ़ जाएगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति भेदभावपूर्ण साबित हो सकती है क्योंकि मोटापा या मानसिक स्वास्थ्य जैसी स्थितियां कई बार सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ी होती हैं, न कि केवल व्यक्तिगत जीवनशैली से।

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