
Nithari Case: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को किया बरी, 2011 का फैसला पलटा
Suprime Court Decision: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निठारी हत्याकांड के दोषी सुरेंद्र कोली की क्यूरेटिव याचिका को स्वीकार करते हुए उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी है। अदालत ने 2011 में दिए गए अपने फैसले को बदलते हुए कोली को सभी आरोपों से बरी कर दिया और तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने यह फैसला सुनाया।
जस्टिस विक्रम नाथ ने आदेश पढ़ते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार की जाती है। 2011 का पुनर्विचार निर्णय रद्द किया जाता है। अभियुक्त को आरोपों से बरी किया जाता है और तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।
इस फैसले के साथ ही सुरेंद्र कोली की सजा और दोषसिद्धि दोनों समाप्त हो गई हैं।
क्या था मामला?
निठारी हत्याकांड 2005 और 2006 के बीच का वह कुख्यात मामला है, जिसने देश को हिला दिया था। नोएडा के निठारी गांव में एक नाले से मानव कंकाल और अवशेष बरामद हुए थे, जिनकी जांच के बाद सामने आया कि यह बच्चों और महिलाओं की हत्याओं का सिलसिला था।
जांच में घर के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली पर हत्या, बलात्कार और नरभक्षण जैसे संगीन आरोप लगे थे।
कोली को 2011 में 15 साल की नाबालिग रिम्पा हलदर की हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले ही 12 मामलों में किया था बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने पिछले फैसले में कोली को 12 अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया था। हालांकि, वह अब तक सिर्फ रिम्पा हलदर मामले में दोषी होने के कारण जेल में था। इसके बाद कोली ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर की थी, जिसमें उसने कहा था कि उसकी दोषसिद्धि केवल एक कथित बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी के आधार पर हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
7 अक्टूबर 2025 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दोषसिद्धि सिर्फ एक बयान और एक चाकू की बरामदगी के आधार पर हुई है। जबकि बाकी सभी मामलों में अभियुक्त को बरी किया जा चुका है। यह एक असामान्य स्थिति है। इसी आधार पर अदालत ने याचिका स्वीकार की और अब कोली को रिहा करने का आदेश दिया है।
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निठारी कांड की भयावहता
2005–2006 में सामने आए इस मामले में 23 से अधिक बच्चों और महिलाओं की हत्या का आरोप लगा था। अधिकांश पीड़ित गरीब परिवारों के बच्चे थे, जो पास के झुग्गी इलाकों से लापता हुए थे। जांच में कई मानव अवशेष, कपड़े और हड्डियाँ बरामद हुई थीं।
इस मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई गई थी, जबकि उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को भी कई मामलों में दोषी ठहराया गया था।
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कानूनी विश्लेषण
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला “क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में सबूतों की मजबूती और न्यायिक पुनर्विचार की अहमियत” को दर्शाता है।
वरिष्ठ वकील ने कहा कि क्यूरेटिव याचिका का स्वीकार होना अपने आप में दुर्लभ है। सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों की कमजोरी और बाकी मामलों में बरी होने के आधार पर सही फैसला लिया।
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