“जो बोया था, वही काटने की नौबत”, शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने पर यूनुस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज

Bangladesh News: बांग्लादेश में चुनावी सुगबुगाहट के बीच देश एक बार फिर हिंसा, विरोध और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से ही मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस को बढ़ते विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में सरकार द्वारा प्राथमिक स्कूलों में संगीत और पीटी शिक्षकों की नियुक्ति योजना रद्द किए जाने के फैसले ने आग में घी का काम किया है।

शिक्षकों और छात्रों का विरोध
सरकार के इस फैसले के खिलाफ देशभर के टीचर्स और यूनिवर्सिटी छात्रों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यूनुस सरकार ने यह निर्णय कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों के दबाव में लिया है, जो संगीत को “गैर-इस्लामिक” मानते हैं।
विरोध करने वालों का आरोप है कि यूनुस सरकार उस रास्ते पर चल रही है, जिससे बांग्लादेश की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक संतुलन दोनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

“जो बोया था, वही काटना पड़ रहा है”
यूनुस के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति “जो बोया था, वही काटना पड़ रहा है” जैसी बन गई है।
दरअसल, शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के दौरान यूनुस ने जिन समूहों के साथ मिलकर सत्ता परिवर्तन किया था, आज वही समूह अब उनके खिलाफ खड़े हो गए हैं।
लोगों का कहना है कि यूनुस सरकार अब उन कट्टरपंथी ताकतों के दबाव में है, जिनकी मदद से उन्होंने सत्ता हासिल की थी।

शिक्षकों पर लाठीचार्ज और देशभर में उबाल
शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने के अलावा, हाल ही में 11वीं ग्रेड वेतनमान की मांग को लेकर भी देशभर में शिक्षकों ने विरोध किया था।
स्कूलों में पढ़ाई ठप पड़ी है और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की घटनाएं भी सामने आई हैं।
ढाका और चिटगांव समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारी शिक्षकों और छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और नियुक्ति बहाली की मांग की।

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अवामी लीग का पलटवार और ढाका लॉकडाउन
इस बीच, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी ‘बांग्लादेश अवामी लीग (एएल)’ ने गुरुवार को ढाका लॉकडाउन का ऐलान किया है।
न्यूज़ एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, यह कदम यूनुस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को संगठित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकार ने संभावित हिंसा को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
गृह मामलों के सलाहकार जहांगीर आलम चौधरी ने कहा कि

“देश में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। पुलिस अब अधिक गश्त कर रही है और सरकारी इमारतों की सुरक्षा भी मजबूत की गई है।”

ढाका में तनाव और हिंसा
ढाका में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अवामी लीग समर्थकों द्वारा सोमवार को किए गए हिंसक प्रदर्शनों में कई बसों को आग के हवाले कर दिया गया और बम विस्फोटों की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। शहर के कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं और नागरिकों में डर का माहौल है।

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अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण का फैसला
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए, बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके शीर्ष सहयोगियों के खिलाफ एक अहम फैसले की तारीख तय कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला देश की राजनीतिक दिशा और यूनुस सरकार के भविष्य दोनों को प्रभावित कर सकता है।

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