SIR फेज-2 पर अखिलेश यादव का बयान… ‘पीडीए प्रहरी’ करेंगे चुनाव आयोग की निगरानी

Akhilesh Yadav on SIR: देशभर में विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) के दूसरे चरण की प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। बिहार में सफलतापूर्वक संपन्न हुए पहले चरण के बाद, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने अब 12 अन्य राज्यों में SIR-2 लागू करने की घोषणा की है। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप शामिल हैं।

नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि SIR के इस चरण में मतदाता सूची का अद्यतन, नए मतदाताओं के नाम जोड़ना, गलत प्रविष्टियों को सुधारना और मतदाता डेटा लिंकिंग-मिलान (Linking & Matching) पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग का लक्ष्य है कि 2026 की शुरुआत तक देशभर की मतदाता सूचियों को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा सके।

इस बीच, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने SIR पर प्रतिक्रिया देते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने एक्स (X) पर लिखा—


“हम SIR के लिए CCTV की तरह PPTV लगाएंगे जिससे किसी का भी वोट कटने न पाए।”

‘पीडीए प्रहरी’ करंगे निगरानी
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि PPTV का मतलब ‘पीडीए प्रहरी’ (PDA Prahari) है। ये पार्टी कार्यकर्ता CCTV की तरह सतर्क रहकर निर्वाचन आयोग की गतिविधियों और मतदाता सूची की प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची में किसी प्रकार की गड़बड़ी या वोट कटने की कोशिश होती है, तो ‘पीडीए प्रहरी’ तुरंत इसकी जानकारी आयोग, मीडिया और जनता को देंगे।

सपा अध्यक्ष ने आगे कहा कि पीडीए प्रहरी का चुनाव आयोग के लिए एक ही संदेश है—‘तू जहां-जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा।’”

चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित प्रमुख तिथियां

  • 28 अक्टूबर से 3 नवंबर 2025: मुद्रण और प्रशिक्षण चरण
  • 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025: गणना और सत्यापन प्रक्रिया
  • 9 दिसंबर 2025: ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन
  • 9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026: दावे और आपत्तियों का समय
  • 9 दिसंबर से 31 जनवरी 2026: सुनवाई और सत्यापन चरण
  • 7 फरवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन

निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस संशोधन अभियान का मकसद नए मतदाताओं—खासकर 18 से 19 वर्ष की उम्र के युवाओं—को मतदाता सूची में जोड़ना और गलत अथवा डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाना है।

राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अखिलेश यादव का यह कदम न केवल 2027 के विधानसभा चुनावों बल्कि 2029 लोकसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा भी है। समाजवादी पार्टी अपने “पीडीए (पिछड़े-दलित-अल्पसंख्यक)” सामाजिक समीकरण को बूथ स्तर तक मजबूत करने में जुटी है।

वहीं, सत्तारूढ़ बीजेपी का कहना है कि निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पारदर्शी है और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं होगी। लेकिन अखिलेश यादव का यह बयान साफ दिखाता है कि विपक्ष अब चुनावी प्रक्रिया की निगरानी को लेकर अधिक सक्रिय और सतर्क हो गया है।

इस तरह SIR चरण-2 की शुरुआत के साथ ही देशभर में चुनावी हलचल और तेज होती दिख रही है।

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