‘रावण राज’ वाले बयान से गरमाई UP की सियासत, शंकराचार्य ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

Avimukteshwaranand Statement: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। गुरुवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि उनकी 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा’ के दौरान कई स्थानों पर प्रशासन ने उनके कार्यक्रमों में बाधाएं खड़ी कीं और कार्यकर्ताओं को बुलडोजर कार्रवाई की धमकियां दी गईं।

शंकराचार्य ने कहा कि प्रदेश में ऐसा माहौल बन गया है, जहां धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां भी प्रशासनिक दबाव से अछूती नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यात्रा से जुड़े लोगों को विभिन्न जिलों में डराने-धमकाने का प्रयास किया गया, जिससे वे अपने कार्यक्रमों का संचालन स्वतंत्र रूप से नहीं कर सके।

‘प्रदेश में भय का वातावरण’
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में असहमति जताने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने उत्तर प्रदेश की स्थिति की तुलना “रावण राज” से करते हुए कहा कि भय और दबाव का वातावरण किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

हालांकि, शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि गौ संरक्षण, सनातन संस्कृति और धार्मिक जागरूकता का संदेश देना है।

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24 जुलाई को होगा वर्चुअल संवा
शंकराचार्य ने बताया कि 24 जुलाई को एक विशेष वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें वे यात्रा के अनुभव साझा करेंगे और आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। उन्होंने अपने अनुयायियों से इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में जुड़ने की अपील की।

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बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल
शंकराचार्य के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

फिलहाल, शंकराचार्य के आरोप सार्वजनिक हैं और इन पर सरकार का पक्ष आना बाकी है। अब 24 जुलाई को प्रस्तावित वर्चुअल कार्यक्रम और सरकार की संभावित प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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