
भारत–अमेरिका व्यापार समझौता जल्द संभव, दोनों देशों से मिले सकारात्मक संकेत
US-India Relation: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं में अब तेजी देखने को मिल रही है। सोमवार को व्हाइट हाउस के शीर्ष आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने संकेत दिए कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौता जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। उनके बयान और भारत की ओर से मिले सकारात्मक संकेतों ने यह उम्मीद और मजबूत कर दी है कि दोनों बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच आर्थिक साझेदारी नए स्तर पर पहुंच सकती है।
व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार: “हम आशावान हैं”
व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने अमेरिकी चैनल CNBC से बातचीत में कहा कि
“भारत हमारा मित्र देश है और हम उम्मीद करते हैं कि बात जल्दी बन जाएगी।”
उन्होंने बताया कि
- ट्रंप प्रशासन इस समझौते को लेकर बहुत सकारात्मक है।
- समझौते की प्रक्रिया में कुछ जटिलताएँ हैं, क्योंकि भारत के रूस के साथ भी मजबूत रिश्ते हैं।
- भारत–अमेरिका संबंधों में कई अलग-अलग पहलू होने के कारण बातचीत थोड़ी संवेदनशील है।
इसके बावजूद हैसेट ने कहा कि संपूर्ण माहौल अनुकूल है और दोनों देशों के बीच बड़ा आर्थिक समझौता जल्द हो सकता है।
भारत के वाणिज्य सचिव का बयान: “समझौता अंतिम चरण में”
भारत की ओर से भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि
- दोनों देशों के अधिकारी नियमित रूप से ऑनलाइन बैठकें कर रहे हैं।
- व्यापार वार्ता तेजी से आगे बढ़ रही है।
- हालांकि कोई तय समय सीमा नहीं है, लेकिन चर्चा का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है।
अग्रवाल के अनुसार, भारत इस समझौते को लेकर काफी गंभीर है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समझौता भारत के आर्थिक हितों के अनुरूप हो।
डोनाल्ड ट्रंप भी आशावान, भारत से टैरिफ कम करने पर विचार
पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत–अमेरिका संबंधों को “बहुत मजबूत” बताते हुए संकेत दिया था कि व्यापार समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।
ट्रंप ने बताया कि
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत बहुत अच्छी चल रही है।
- वे अगले साल दिल्ली की यात्रा कर सकते हैं।
- भारत पर लगाए गए कुछ शुल्क (टैरिफ) कम किए जा सकते हैं।
सोमवार को एक बार फिर ट्रंप ने कहा कि दोनों देश ऐसे समझौते के काफी करीब हैं जिससे “सबको लाभ” होगा।
भारत की स्पष्ट नीति: किसानों और श्रमिकों के हित सर्वोपरि
भले ही सरकार सकारात्मक है, लेकिन वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा है कि
भारत किसी भी कीमत पर किसानों, डेयरी क्षेत्र और श्रमिकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।
भारत एक “न्यायसंगत और संतुलित व्यापार समझौता” चाहता है।
समझौता कभी भी हो सकता है—कल, अगले महीने या अगले वर्ष, यह दोनों देशों की तैयारियों पर निर्भर करेगा।
सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण यह है कि भारत की आंतरिक आर्थिक संरचना को ध्यान में रखकर ही कोई भी समझौता आगे बढ़ाया जाएगा।
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ऊर्जा व्यापार से संतुलन सुधारने की कोशिश
भारत ने हाल के वर्षों में अमेरिका से तेल और गैस की खरीद में वृद्धि की है।
इसका उद्देश्य
- दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर करना, और
- ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना है।
अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ना दर्शाता है कि दोनों देशों के आर्थिक संबंध कई स्तरों पर व्यापक हो रहे हैं।
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समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत
कुल मिलाकर,
- दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व,
- व्यापार अधिकारी, और
- आर्थिक सलाहकारों
के बयान स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौता अब पहले की तुलना में कहीं अधिक नजदीक है। हालांकि कृषि, डेयरी और श्रम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर भारत अभी भी सावधान है।
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