अल्जाइमर शोध में बड़ी सफलता… मस्तिष्क के विषाक्त प्रोटीन की लंबाई मापना संभव

Tel Aviv News: अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के रहस्यों को समझने की दिशा में विज्ञान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। दशकों से चुनौतीपूर्ण माना जाने वाला कार्य—मस्तिष्क में जमा टाउ प्रोटीन के फाइब्रिल्स की लंबाई मापना—अब संभव हो गया है।

इजरायल और नीदरलैंड के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जिसने चिकित्सा जगत में नई उम्मीद जगा दी है। यह तकनीक न केवल बीमारी की जड़ को पकड़ने में मदद करेगी, बल्कि डिमेंशिया के निदान का एक बिल्कुल नया रास्ता भी खोल सकती है।

नई तकनीक: फाइब्रिल्स पेंट और फाइब्रिल्स रूलर

  • इस तकनीक के माध्यम से टाउ एमाइलाइड फाइब्रिल्स की लंबाई सीधे मापी जा सकती है।
  • यह विधि तब भी प्रभावी है जब फाइब्रिल्स तरल पदार्थ में तैर रहे हों और उनकी मात्रा बहुत कम हो।
  • चूंकि इन फाइब्रिल्स का बढ़ना सीधे अल्जाइमर और डिमेंशिया से जुड़ा है, इसलिए इसका सटीक माप बीमारी की पहचान और निदान में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

टाउ प्रोटीन: सामान्य और खतरनाक रूप

  • सामान्य स्थिति: टाउ प्रोटीन मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं की संरचना बनाए रखते हैं और उनके कार्य में मदद करते हैं।
  • बीमारी की स्थिति: टाउ प्रोटीन असामान्य रूप से गुच्छे बनाकर लंबे एमाइलाइड फाइब्रिल्स में बदल जाते हैं। यह न्यूरोडीजेनेरेटिव प्रक्रियाओं को तेज करता है।
  • हिब्रू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर असाफ फ्राइडलर के अनुसार, फाइब्रिल्स की लंबाई बीमारी की प्रक्रिया का एक प्रमुख संकेतक है।

स्मार्ट चाबी की तरह काम करता फाइब्रिलपेंट-1

  • यह 22-एमिनो एसिड पेप्टाइड हानिकारक फाइब्रिल्स को विशेष रूप से पहचानता है और उन्हें फ्लोरोसेंट संकेतक के माध्यम से उजागर करता है।
  • यह सुरक्षित टाउ अणुओं को अनदेखा करता है, जिससे शोधकर्ताओं को हानिकारक और सुरक्षित प्रोटीन के बीच अंतर पहचानना आसान होता है।
  • तकनीक जटिल नमूनों में भी सटीक मापन और अंतर सुनिश्चित करती है।

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पुरानी तकनीकों की सीमाएं

  • माइक्रोस्कोपी जैसी पुरानी तकनीकें बड़ी मात्रा के नमूनों की मांग करती थीं और फाइब्रिल्स को उनके प्राकृतिक वातावरण से अलग कर देती थीं।
  • ये केवल आकार का अप्रत्यक्ष अनुमान देती थीं।
  • नई तकनीक इन सभी कमियों को दूर करती है और फाइब्रिल्स की वास्तविक लंबाई मापने में सक्षम है।

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शोध का नेतृत्व और प्रकाशन

  • शोध का नेतृत्व हिब्रू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर असाफ फ्राइडलर और यूट्रेक्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टेफान जीडी रुडिगर ने किया।
  • अध्ययन को नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस की प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
  • शोध भविष्य में डिमेंशिया और अल्जाइमर के निदान और उपचार में नई संभावनाएं खोल सकता है।

यह नई तकनीक अल्जाइमर और डिमेंशिया के निदान और इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। वैज्ञानिक अब हानिकारक टाउ फाइब्रिल्स की लंबाई मापकर बीमारी की जड़ तक पहुँचने और उपचार विकसित करने में सक्षम होंगे। इससे रोगियों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने और प्रभावी दवा विकसित करने के रास्ते खुलेंगे।

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