CWC बैठक में खड़गे का मोदी सरकार पर तीखा हमला, मनरेगा और लोकतंत्र पर उठाए सवाल

CWC Meeting: नई दिल्ली में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की अहम बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। बैठक की शुरुआत करते हुए खड़गे ने कहा कि देश में लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों पर अभूतपूर्व संकट मंडरा रहा है और ऐसे समय में कांग्रेस को मजबूत, स्पष्ट और जनपक्षधर रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।

खड़गे ने मनरेगा, मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR), केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग, संगठनात्मक मजबूती, आगामी विधानसभा चुनावों और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी।

मनरेगा को कमजोर करना गरीबों की पीठ में छुरा: खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मोदी सरकार ने मनरेगा को खत्म या कमजोर करने का रास्ता अपनाकर करोड़ों गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्गों पर सीधा हमला किया है।

खड़गे ने कहा,

“मनरेगा को समाप्त करना सिर्फ गरीबों के पेट पर लात मारना नहीं है, बल्कि उनकी पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों और उनके सम्मान पर सीधा प्रहार है।”

उन्होंने सोनिया गांधी के लेख का हवाला देते हुए कहा कि मनरेगा ने सर्वोदय की भावना को साकार किया और देश में काम के अधिकार को वास्तविक मजबूती दी।

संविधान और नीति निर्देशक सिद्धांतों की अनदेखी का आरोप
खड़गे ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करना संविधान के नीति निर्देशक सिद्धांतों और अनुच्छेद 41 की भावना के खिलाफ है। उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में काम का अधिकार, भोजन का अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अधिकारों को मजबूती देने का प्रयास किया गया था।

उनका आरोप था कि मौजूदा सरकार को गरीबों और मेहनतकश वर्ग की चिंता नहीं है, बल्कि कुछ चुनिंदा बड़े पूंजीपतियों के मुनाफे की ज्यादा फिक्र है।

मनरेगा की शुरुआत और ग्रामीण भारत पर प्रभाव
कांग्रेस अध्यक्ष ने मनरेगा के इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि इस योजना की शुरुआत 2 फरवरी 2006 को आंध्र प्रदेश के बंडलापल्ली से हुई थी।

खड़गे के मुताबिक, मनरेगा के कारण—

  • ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर पलायन रुका
  • अकाल और भूख से जूझ रहे गांवों को राहत मिली
  • दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा मिली

उन्होंने कहा कि बिना किसी अध्ययन और व्यापक परामर्श के मनरेगा को खत्म करना वैसा ही है, जैसा तीन कृषि कानूनों के मामले में किया गया था, जिन्हें बाद में जनता के दबाव में सरकार को वापस लेना पड़ा।

मनरेगा बहाली के लिए देशव्यापी जन आंदोलन का आह्वान
खड़गे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस मनरेगा की बहाली के लिए देशव्यापी जन आंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा कि जैसे भूमि अधिग्रहण कानून और कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष में जनता जीती, वैसे ही इस मुद्दे पर भी सरकार को पीछे हटना पड़ेगा।

संगठन सृजन अभियान और जमीनी मजबूती
बैठक में संगठनात्मक ढांचे पर जोर देते हुए खड़गे ने बताया कि संगठन सृजन अभियान के तहत करीब 500 जिलों में नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है। अगले 120 दिनों में शेष जिलों में भी संगठनात्मक प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब जमीनी स्तर पर दोबारा मजबूत होकर जनता के मुद्दों के साथ मैदान में उतरेगी।

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मतदाता सूची, SIR और लोकतांत्रिक अधिकारों की चिंता
खड़गे ने मतदाता सूचियों से नाम काटे जाने की आशंका जताई और कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रची जा रही है।

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और बीएलए (BLA) को निर्देश दिया कि वे घर-घर जाकर मतदाता सूची की निगरानी करें और हर मतदाता के अधिकार की रक्षा करें।

आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि अप्रैल–मई 2026 में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी पूरी एकजुटता के साथ तैयारी कर रही है।

साथ ही 2027 में चुनाव वाले राज्यों के लिए भी अभी से संगठन, मतदाता सूची और चुनावी रणनीति पर काम शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

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केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
खड़गे ने आरोप लगाया कि बीते 11 वर्षों में ED, IT और CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को डराने और बदनाम करने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में भी कांग्रेस कानूनी तौर पर मजबूती से मुकाबला कर रही है।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की निंदा
बैठक के दौरान खड़गे ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही भारत में भी त्योहारों के दौरान सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिशों पर चिंता जताई और शांति व भाईचारे की अपील की।

CWC बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण से यह साफ संकेत मिला कि कांग्रेस आने वाले समय में मनरेगा, लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों को लेकर आक्रामक राजनीतिक और जन आंदोलन की रणनीति अपनाने जा रही है। संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावों की तैयारी के साथ कांग्रेस ने केंद्र सरकार को सीधी चुनौती देने का रोडमैप पेश कर दिया है।

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