जयशंकर का पाकिस्तान को सख्त संदेश… ‘आतंकवाद पर भारत अपने फैसले खुद करेगा’

S. Jaishankar: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रति भारत के कड़े रुख को दोहराते हुए कहा है कि देश को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार है और इस पर कोई भी बाहरी दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

शुक्रवार, 2 जनवरी को IIT मद्रास में छात्रों से संवाद के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत यह स्वयं तय करेगा कि उसे क्या करना है और कैसे करना है।

हमारे पास बुरे पड़ोसी हैं: जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक राजनीति में कई बार देशों को ऐसे पड़ोसियों का सामना करना पड़ता है, जो शांति के बजाय हिंसा और अस्थिरता को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे पास बुरे पड़ोसी हैं। यदि कोई देश जानबूझकर, लगातार और बिना किसी पछतावे के आतंकवाद को जारी रखता है, तो भारत के पास अपने लोगों की रक्षा के लिए कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अधिकार के इस्तेमाल के तरीके तय करना भारत का संप्रभु निर्णय है।

ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में पिछले वर्ष चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया और इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक नीति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर ठोस और प्रभावी कदम उठाने में सक्षम है।

गौरतलब है कि अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली थी। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों और उनके बुनियादी ढांचे पर कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई को भारत की आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का स्पष्ट संकेत माना गया।

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भारत खुद करेगा फैसला
जयशंकर ने कहा, “हम उस अधिकार का उपयोग कैसे करेंगे, यह पूरी तरह हम पर निर्भर करता है। कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए।” उनके इस बयान को भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के रूप में देखा जा रहा है।

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पाकिस्तान को कड़ा संदेश
सिंधु नदी जल समझौते पर बोलते हुए विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को एक और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जल बंटवारे की व्यवस्था उस दौर में बनी थी, जब पड़ोसी देशों से जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती थी। लेकिन यदि कोई देश दशकों तक आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो वह अच्छे पड़ोसी के लाभों की मांग नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा, “आप यह नहीं कह सकते कि हमें पानी भी चाहिए और साथ ही आतंकवाद भी जारी रहेगा।”

विशेषज्ञों के अनुसार, जयशंकर का यह बयान न केवल पाकिस्तान के लिए चेतावनी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के सवाल पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

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