लंदन में रहकर यूपी से सैलरी-पेंशन… शमशुल हुदा कनेक्शन पर दो मदरसों पर गाज

UP News: उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संत कबीर नगर और आजमगढ़ जिले के दो मदरसों की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। यह कार्रवाई लंदन में रह रहे मौलाना शमशुल हुदा से इन मदरसों के सीधे संबंध सामने आने और गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं के उजागर होने के बाद की गई है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि जांच में नियमों के उल्लंघन, गलत दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति और विदेशी नागरिक द्वारा वेतन व पेंशन लेने जैसे गंभीर तथ्य सामने आए हैं।

रद्द की गई मान्यताओं में संत कबीर नगर स्थित मदरसा कुलियातुल बनातिर रजबिया और आजमगढ़ का मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत शामिल हैं। परिषद के अनुसार, संत कबीर नगर का मदरसा स्वयं मौलाना शमशुल हुदा द्वारा संचालित किया जा रहा था, जबकि आजमगढ़ के मदरसे में वह लंबे समय तक सहायक अध्यापक के रूप में कागजी तौर पर नियुक्त दिखाया गया।

ब्रिटेन में रहते हुए भी लेता रहा वेतन और पेंशन
जांच में सामने आया है कि मौलाना शमशुल हुदा वर्ष 2007 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चला गया था और 2013 में उसने ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली थी। इसके बावजूद वर्ष 2017 तक उसे आजमगढ़ स्थित मदरसे में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत दिखाया गया और नियमित रूप से वेतन का भुगतान किया गया। इतना ही नहीं, सेवा समाप्ति के बाद पेंशन भुगतान किए जाने के भी दस्तावेजी साक्ष्य जांच एजेंसियों को मिले हैं।

नियमों के मुताबिक, विदेशी नागरिक को सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे में इस प्रकार की नियुक्ति और भुगतान पूरी तरह अवैध है। इसे प्रशासनिक तंत्र की गंभीर चूक और संभावित मिलीभगत के रूप में देखा जा रहा है।

ATS रिपोर्ट के बाद खुला मामला
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश एटीएस की रिपोर्ट के बाद सामने आया। एटीएस की प्रारंभिक जांच में मदरसों को मिलने वाले फंड में विदेशी स्रोतों की आशंका जताई गई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि शमशुल हुदा के कुछ संपर्क संदिग्ध थे और उनकी गतिविधियों की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील हो सकती है।

एटीएस की रिपोर्ट के आधार पर शमशुल हुदा के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत दस्तावेजों के इस्तेमाल और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन सहित अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।

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ED ने भी शुरू की फंडिंग की जांच
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामले में जांच शुरू कर दी है। ईडी इस बात की पड़ताल कर रही है कि इन मदरसों को मिलने वाले फंड का स्रोत क्या था, धन किन माध्यमों से आया और क्या उसका इस्तेमाल किसी संदिग्ध या गैरकानूनी गतिविधि में किया गया।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां बैंक खातों, ट्रस्ट दस्तावेजों, विदेशी लेन-देन और नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। यदि विदेशी फंडिंग की पुष्टि होती है तो मनी लॉन्ड्रिंग के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

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मदरसा शिक्षा परिषद का सख्त रुख
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी मदरसे को बख्शा नहीं जाएगा। परिषद के अधिकारियों के मुताबिक, यदि जांच में अन्य मदरसों में भी इसी तरह की अनियमितताएं पाई जाती हैं तो उनकी मान्यता भी रद्द की जाएगी।

इस पूरे प्रकरण ने प्रदेश में मदरसों की मान्यता, फंडिंग व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और जांच एजेंसियों की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आने वाले समय में मदरसों के ऑडिट और सत्यापन की प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा।

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