
गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ लॉन्च… ट्रंप को नहीं मिला व्यापक समर्थन, भारत ने बनाई दूरी
Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में गाजा संकट को लेकर प्रस्तावित ‘Board of Peace’ (बोर्ड ऑफ पीस) को औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। ट्रंप ने इसे वैश्विक शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए दुनियाभर के देशों को इसमें शामिल होने का न्योता दिया था। हालांकि, इस पहल को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिल पाया और भारत समेत कई अहम देशों ने इससे दूरी बना ली।
सीमित देशों की मौजूदगी
रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ऑफ पीस की साइनिंग सेरेमनी में 20 से भी कम देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अर्जेंटीना और पैराग्वे जैसे देशों की मौजूदगी रही। खास बात यह रही कि अमेरिका के पारंपरिक पश्चिमी यूरोपीय सहयोगियों में से कोई भी देश इस मंच पर मौजूद नहीं था। स्टेज पर दिखे ज्यादातर प्रतिनिधि मिडिल ईस्ट और दक्षिण अमेरिका से जुड़े थे।
भारत ने बनाई दूरी
भारत को भी ट्रंप के इस बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया था, लेकिन नई दिल्ली से कोई प्रतिनिधि इस समारोह में शामिल नहीं हुआ। भारत का इस पहल से दूर रहना कूटनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है, क्योंकि भारत गाजा संकट और वैश्विक शांति प्रयासों पर आमतौर पर संतुलित और बहुपक्षीय रुख अपनाता रहा है।
Trump का दावा: “हर कोई जुड़ना चाहता है”
दावोस में साइनिंग सेरेमनी के दौरान ट्रंप ने मंच से कहा कि आज आपकी मौजूदगी से हम सच में सम्मानित महसूस कर रहे हैं। हर कोई हमारे शांति बोर्ड का हिस्सा बनना चाहता है।”
उन्होंने यह भी दावा दोहराया कि राष्ट्रपति बनने के बाद से उन्होंने आठ युद्धों को सुलझाने में भूमिका निभाई है। ट्रंप ने संकेत दिया कि जल्द ही एक और बड़ा समझौता होने वाला है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध को लेकर उन्होंने स्वीकार किया कि यह उनकी अपेक्षा से कहीं ज्यादा जटिल साबित हो रहा है। इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी मौजूद रहे।
यह भी पढ़ें…
Greenland खरीद पर पुतिन का तंज… Trump के सामने रखी नई कीमत
यूरोप का स्पष्ट इनकार
ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस को लेकर यूरोप में सबसे ज्यादा असहमति देखने को मिली।
- नॉर्वे और स्वीडन ने साफ कहा कि वे इस पहल में शामिल नहीं होंगे।
- फ्रांस ने भी इनकार करते हुए कहा कि वह गाजा शांति प्रयासों का समर्थन करता है, लेकिन उसे आशंका है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर सकता है।
यूरोपीय देशों का मानना है कि गाजा जैसे संवेदनशील संघर्षों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र ही मुख्य और वैध मंच होना चाहिए।
यह भी पढ़ें…
Australia के न्यू साउथ वेल्स में गोलीबारी… तीन लोगों की मौत, एक गंभीर रूप से घायल
रूस का रुख: सोच-समझकर फैसला
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस पर कोई भी फैसला रणनीतिक साझेदारों से परामर्श के बाद ही लिया जाएगा। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में पुतिन ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्रालय को भेजे गए दस्तावेजों का अध्ययन करने और सहयोगी देशों से चर्चा करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुतिन ने यह भी कहा कि रूस अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के प्रयासों का समर्थन करता है और यूक्रेन संकट के समाधान में अमेरिकी भूमिका को भी महत्व देता है, लेकिन किसी नए मंच में शामिल होने से पहले व्यापक विचार जरूरी है।
ट्रंप का गाजा बोर्ड ऑफ पीस फिलहाल सीमित समर्थन के साथ आगे बढ़ता दिख रहा है। भारत और प्रमुख यूरोपीय देशों की दूरी यह संकेत देती है कि वैश्विक स्तर पर इस पहल को लेकर भरोसा और सहमति अभी अधूरी है। पाकिस्तान समेत कुछ देशों की मौजूदगी जरूर रही, लेकिन बड़े लोकतांत्रिक और बहुपक्षीय शक्तियों के बिना यह बोर्ड अंतरराष्ट्रीय मंच पर कितना प्रभावी होगा, यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।
यह भी पढ़ें…





