ईरान तनाव बढ़ा… हूती विद्रोहियों की धमकी से लाल सागर में युद्ध के बादल

US-Iran Conflict: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की अटकलों के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने भी मोर्चा संभालने के संकेत दे दिए हैं। हूती विद्रोहियों ने साफ किया है कि यदि ईरान पर हमला किया गया, तो वे लाल सागर में अमेरिकी और इजरायली जहाजों को निशाना बना सकते हैं, जिससे यह रणनीतिक समुद्री क्षेत्र युद्ध का मैदान बन सकता है।

ईरान के समर्थन में हूती विद्रोही अलर्ट
हूती विद्रोही लंबे समय से ईरान समर्थित माने जाते हैं और पहले भी लाल सागर व अदन की खाड़ी में कई बार हमले कर चुके हैं। क्षेत्रीय सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कदम के बाद हूती विद्रोही अपने हमलों का दायरा बढ़ा सकते हैं। इससे न सिर्फ सैन्य तनाव बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

लाल सागर क्यों है रणनीतिक रूप से अहम
लाल सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच बड़े पैमाने पर तेल और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति होती है। यदि यहां सैन्य टकराव बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में उछाल, शिपिंग लागत में वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की आशंका जताई जा रही है।

अमेरिका और इजरायल की बढ़ती सक्रियता
बीते समय में अमेरिका और इजरायल दोनों ने ईरान पर क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने और हथियारबंद समूहों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। मौजूदा हालात में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई पूरे मध्य पूर्व को व्यापक संघर्ष की ओर धकेल सकती है।

पहले भी हो चुके हैं हमले
गौरतलब है कि हूती विद्रोही पहले भी लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर चुके हैं। इन हमलों के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने सुरक्षा बढ़ाई थी और कई बार जवाबी कार्रवाई भी की गई। ऐसे में नए टकराव की आशंका अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

वैश्विक समुदाय की चिंता
संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठन पहले ही सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान, अमेरिका, इजरायल और हूती विद्रोही सीधे टकराव में आते हैं, तो यह संघर्ष क्षेत्रीय न रहकर वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।

फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। कूटनीतिक प्रयासों और बैक-चैनल बातचीत पर सबकी नजर टिकी है। आने वाले दिनों में अमेरिका और इजरायल की रणनीति तथा ईरान की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि मध्य पूर्व शांति की ओर बढ़ेगा या एक और बड़े युद्ध की ओर।

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