आलू-प्याज के बाद अब सोना‑चांदी भी RBI की निगरानी… महंगाई आंकड़ों में होगा बड़ा बदलाव

RBI Rules: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आज अपनी मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (महंगाई निगरानी ढांचा) में एक अहम बदलाव किया है। अब सोना और चांदी को भी उन वस्तुओं की सूची में शामिल किया जाएगा, जिनकी कीमतों पर RBI खास नजर रखेगा — ठीक वैसे ही जैसे पहले से आलू, प्याज़ और टमाटर जैसे खाद्य वस्तुओं की निगरानी होती थी।

यह फैसला RBI की हालिया मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक के दौरान लिया गया, जहां महंगाई और आर्थिक दिशा को लेकर नीतिगत समीक्षाएं भी की गयीं।

क्या हुआ बदलाव?
RBI ने अपने महंगाई माप (CPI) के ढांचे में यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि सोना और चांदी की कीमतों में तेजी और उतार‑चढ़ाव ने महंगाई के आंकड़ों को प्रभावित किया है। यदि इन्हें गणना से निकाल दें, तो मुख्य महंगाई (core inflation) लगभग 2.6% पर स्थिर रहती है — लेकिन कीमती धातुओं ने महंगाई को ऊपर खींचने में भूमिका निभाई है।

RBI ने स्पष्ट किया है कि इसका तुरंत मतलब यह नहीं है कि कीमतें खुद घटें या बढ़ेंगी, बल्कि यह महंगाई की निगरानी अधिक व्यापक और सटीक बनाने के लिए जरूरी था।

सोना‑चांदी की कीमतों का हाल

  • सोने के दाम:
    एमसीएक्स पर सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास देखा गया है, जो वैश्विक और घरेलू बाजार की अनिश्चितताओं का प्रभाव दर्शाता है।
  • चांदी में उतार‑चढ़ाव:
    चांदी के भाव में आने वाली अस्थिरता और गिरावट भी देखने को मिली है, जिससे बाजार की कीमतों पर निगरानी और जरूरी दिखाई दे रही है।

RBI ने क्या कहा?

  • RBI ने कहा कि महंगाई की वेबसाइट जिसका निर्माण करते समय अब कीमती धातुओं को शामिल करने से बाजार के व्यापक दबावों का बेहतर अंदाज़ा मिलेगा।
  • बैंक ने यह भी चेताया है कि भू‑राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और मौसम‑आधारित जोखिमों से महंगाई पर और दबाव बन सकता है।
  • Core inflation जब सोना‑चांदी को हटाकर देखा जाता है तो यह नियंत्रण में बनी रहती है, जिसका मतलब है कि पूरी अर्थव्यवस्था में मूल दबाव अभी तक कम है।

आपकी जेब पर असर

  • तुरंत बदलाव नहीं: इस फैसले का सीधा असर सोना‑चांदी के दामों पर तुरंत घटने या बढ़ने का कारण नहीं बनेगा।
  •  नीति‑निर्माण में मदद: इससे RBI और सरकार महंगाई के आंकड़ों को और बेहतर तरीके से समझ पाएंगे और भविष्य की नीतियों (जैसे ब्याज दर, नकदी प्रबंधन, आर्थिक रणनीतियां) में सटीक निर्णय ले सकेंगे।
  •  निवेशकों के लिए संकेत: कीमती धातुओं की कीमत अब नीति‑निर्माण प्रक्रिया में भी अहम भूमिका निभाएगी, जिससे लंबी अवधि के निवेश विचारों पर असर पढ़ सकता है।

नीति का व्यापक अर्थ
RBI अब महंगाई को सिर्फ खाद्य वस्तुओं तक सीमित नहीं देख रहा है। सोना और चांदी जैसे बुलियन बाजार के रुझान अब महंगाई आंकड़ों का हिस्सा बनेंगे। इसका मकसद यह है कि महंगाई के प्रभाव का पूरा परिदृश्य सामने आए और नीति‑निर्माण अधिक मजबूत और सटीक हो।

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