डील को लेकर कांग्रेस के तीखे तीर… जयराम बोले ‘हाउडी मोदी’ पर भारी पड़ा ‘नमस्ते ट्रंप’

US-India Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील फ्रेमवर्क को लेकर देश की राजनीति गर्म हो गई है। कांग्रेस ने इस समझौते को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का दावा है कि संयुक्त बयान से साफ हो गया है कि भारत को इस समझौते से अपेक्षित लाभ नहीं मिला है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को बयान जारी करते हुए कटाक्ष किया कि ‘हाउडी मोदी’ पर ‘नमस्ते ट्रंप’ भारी पड़ गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ‘गले मिलने वाली कूटनीति’ से भारत को ठोस आर्थिक लाभ मिलता दिखाई नहीं दे रहा है।


कांग्रेस ने उठाए कई सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच जारी संयुक्त बयान में कई ऐसे संकेत मिलते हैं, जिससे यह आशंका पैदा होती है कि व्यापारिक समझौते में भारत को ज्यादा रियायतें नहीं मिली हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत ने अपने बाजार को खोलने के बदले पर्याप्त लाभ सुनिश्चित किया है या नहीं।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि सरकार को देश के किसानों, छोटे उद्योगों और घरेलू व्यापार पर इस समझौते के प्रभाव को स्पष्ट करना चाहिए। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए।

‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ का दिया संदर्भ
कांग्रेस ने अपने बयान में अमेरिका में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम और भारत में आयोजित ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों का दावा किया गया था। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि इन आयोजनों के बावजूद भारत को व्यापारिक मोर्चे पर ठोस लाभ नहीं मिला।

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सरकार का रुख— समझौता बताएगी नई दिशा
हालांकि केंद्र सरकार इस ट्रेड डील फ्रेमवर्क को भारत के लिए बड़ा अवसर बता रही है। सरकार का कहना है कि इससे भारत को अमेरिका के विशाल बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे किसानों, MSME सेक्टर और स्टार्टअप्स को फायदा होगा। इसके अलावा यह समझौता वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने में भी मदद करेगा।

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राजनीतिक माहौल गरमाने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकती है। विपक्ष जहां सरकार से पारदर्शिता और स्पष्टता की मांग कर रहा है, वहीं सरकार इसे आर्थिक विकास और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम बता रही है।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक मंचों पर बहस तेज होने की संभावना है।

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