
विधानसभा सत्र बना मुसीबत… वीआईपी मूवमेंट के बीच जाम में फंसे मरीज
Lucknow Traffic Jam: उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। विधानसभा सत्र को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा लागू किया गया रूट डायवर्जन पहले ही दिन फेल हो गया, जिससे हजरतगंज और आसपास के इलाकों में भीषण जाम लग गया।
हालात इतने खराब रहे कि सिविल अस्पताल से मुख्यमंत्री आवास जाने वाली सड़क पर एम्बुलेंस तक जाम में फंस गई, जिससे आम लोगों के साथ-साथ मरीजों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हजरतगंज बना जाम का केंद्र
सोमवार को हजरतगंज चौराहे से सिविल अस्पताल की ओर जाने वाली सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। नाजा मार्केट से लेकर नावेल्टी सिनेमा तक सड़क पूरी तरह जाम रही। वाहन रेंगते नजर आए और कई जगहों पर लोग पैदल चलने को मजबूर हो गए। सीएम आवास वाले चौराहे पर भी हालात बेहद खराब रहे, जहां चारों ओर से आने वाला ट्रैफिक आपस में उलझ गया।
डायवर्जन ने बढ़ाई परेशानी
विधानसभा सत्र के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने विधानभवन और लोकभवन के आसपास के इलाकों में सख्त डायवर्जन लागू किया था। हजरतगंज की ओर जाने वाले कई मुख्य रास्तों को बंद कर दिया गया, लेकिन वैकल्पिक मार्गों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण ट्रैफिक का दबाव उन सड़कों पर बढ़ गया। नतीजा यह रहा कि परिवर्तन चौक, स्वास्थ्य भवन और आसपास की सड़कों पर भी लंबा जाम लग गया।
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एम्बुलेंस फंसी, लोगों में नाराजगी
जाम के दौरान सबसे चिंताजनक स्थिति तब सामने आई जब एम्बुलेंस भी ट्रैफिक में फंसी नजर आई। मरीजों और उनके परिजनों को समय पर अस्पताल पहुंचने में दिक्कत हुई। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि हर साल विधानसभा सत्र के दौरान जाम की समस्या होती है, लेकिन इसके बावजूद ठोस व्यवस्था नहीं की जाती।
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पुलिस-प्रशासन की सफाई
ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। जैसे-जैसे लोगों को डायवर्जन की जानकारी होगी, हालात बेहतर होंगे। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि पहले ही दिन ट्रैफिक प्लान की पोल खुल गई।
कुल मिलाकर, विधानसभा सत्र के पहले ही दिन राजधानी लखनऊ में आम जनता को भारी कीमत चुकानी पड़ी। आने वाले दिनों में यदि ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सत्र के दौरान जाम की समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।
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