
किसानों का अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ प्रदर्शन, भारत बंद का आंशिक असर
Bharat Bandh Today: 12 फरवरी 2026 को देशभर में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के संयुक्त मंच द्वारा बुलाए गए ‘भारत बंद’ का असर कई राज्यों में अलग-अलग रूप में देखने को मिला। जहां कुछ राज्यों में प्रदर्शन और धरना-प्रदर्शन के चलते यातायात और बाजार आंशिक रूप से प्रभावित रहे, वहीं कई बड़े शहरों में जनजीवन सामान्य बना रहा।
पंजाब में सबसे ज्यादा असर
भारत बंद का सबसे ज्यादा असर पंजाब में देखने को मिला। यहां किसान संगठनों ने अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर हाईवे जाम किए गए और जिला मुख्यालयों पर धरना दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विदेशी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने से स्थानीय किसानों पर सीधा असर पड़ेगा।
कुछ जगहों पर ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई, हालांकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था।
अन्य राज्यों में मिला-जुला असर
हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और केरल के कुछ हिस्सों में भी रैलियां और विरोध प्रदर्शन हुए। औद्योगिक इलाकों में श्रमिक संगठनों ने कामकाज ठप रखने की अपील की, लेकिन पूर्ण बंद जैसी स्थिति अधिकतर जगहों पर नहीं दिखी।
दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और बेंगलुरु जैसे महानगरों में सार्वजनिक परिवहन और बाजार सामान्य रूप से खुले रहे। स्कूल-कॉलेज भी अधिकतर स्थानों पर संचालित हुए।
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बैंकिंग और सरकारी सेवाएं सामान्य
भारत बंद के बावजूद बैंकिंग सेवाओं पर खास असर नहीं पड़ा। अधिकतर सरकारी और निजी बैंक खुले रहे और लेन-देन सामान्य तरीके से चलता रहा। एटीएम सेवाएं भी सुचारू रहीं। हालांकि कुछ स्थानों पर बैंक कर्मचारियों के प्रतीकात्मक समर्थन की खबरें सामने आईं।
सरकारी दफ्तरों में भी उपस्थिति सामान्य रही, जिससे आम नागरिकों को जरूरी कामकाज में बड़ी परेशानी नहीं हुई।
क्या हैं प्रमुख मांगें?
संयुक्त मंच ने श्रम कानूनों में संशोधन, निजीकरण की नीतियों पर रोक, न्यूनतम वेतन की गारंटी और अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते पर पुनर्विचार जैसी मांगें उठाई हैं। किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार की नीतियां कृषि और श्रमिक वर्ग के हितों के खिलाफ हैं।
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सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार की ओर से फिलहाल आधिकारिक बयान सीमित रहा है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने कहा है कि व्यापार समझौते देशहित को ध्यान में रखकर किए जाते हैं और किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
कुल मिलाकर, 12 फरवरी का भारत बंद देशभर में पूरी तरह सफल या पूरी तरह असफल नहीं कहा जा सकता। कुछ राज्यों में इसका असर स्पष्ट दिखा, जबकि कई हिस्सों में जनजीवन सामान्य रहा। अब देखना होगा कि सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच आगे की बातचीत किस दिशा में बढ़ती है।
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