
फिल्मी कनेक्शन से सियासी वार… पोस्टरों में दिखी अखिलेश की ‘धुरंधर’ छवि
Poster War: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ नाम के संगठन ने राज्य के कई जिलों में पोस्टर और होर्डिंग्स के जरिए सियासी बहस छेड़ दी। राजधानी Lucknow समेत सीतापुर, नोएडा और अमेठी सहित करीब 10 जिलों में लगाए गए इन पोस्टरों में समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav को निशाने पर लिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ संगठन ने अपने कैंपेन में अखिलेश यादव की तस्वीरों को फिल्म ‘धुरंधर-2’ के कथित किरदारों से जोड़ते हुए पेश किया है। पोस्टरों में उन्हें ‘रहमान डकैत’ जैसे पात्र के रूप में दिखाया गया है और सवाल उठाया गया है—
“ल्यारी राज चाहिए या धुरंधर CM?”
इन पोस्टरों के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
क्या कहता है संगठन?
संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष Ashutosh Singh का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य खास तौर पर Gen-Z युवाओं को जागरूक करना है।

उनके मुताबिक, आज की युवा पीढ़ी को यह बताना जरूरी है कि पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था की क्या स्थिति थी और माफिया राज किस तरह हावी था। संगठन का दावा है कि वह युवाओं को “सही राजनीतिक विकल्प” के प्रति जागरूक करना चाहता है।
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फिल्मी कनेक्शन से सियासी वार
हाल ही में फिल्म ‘धुरंधर-2’ बॉक्स ऑफिस पर चर्चा में है और इसके किरदारों को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। अब उसी फिल्म के संदर्भ में राजनीतिक पोस्टर बनाए जाने से सियासी माहौल और गर्म हो गया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि फिल्मों के किरदारों को राजनीतिक प्रतीकों के रूप में इस्तेमाल करना एक नई रणनीति के तौर पर उभर रहा है, जिससे युवा वर्ग पर ज्यादा प्रभाव डाला जा सके।
सियासी प्रतिक्रिया और बढ़ता विवाद
इन पोस्टरों के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। विपक्ष इसे “छवि खराब करने की साजिश” बता रहा है, जबकि समर्थक इसे राजनीतिक अभिव्यक्ति का हिस्सा मान रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, इस तरह के कैंपेन और तीखे हो सकते हैं।
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क्या है इसका बड़ा संकेत?
यह पूरा मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब युवाओं को केंद्र में रखकर नैरेटिव तैयार किया जा रहा है।सोशल मीडिया, पोस्टर कैंपेन और पॉप कल्चर (जैसे फिल्म किरदार) का इस्तेमाल करके राजनीतिक संदेश को ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
Uttar Pradesh में ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ का यह अभियान सिर्फ पोस्टर विवाद नहीं, बल्कि बदलती राजनीतिक रणनीतियों का संकेत है। जहां एक ओर यह अभियान युवाओं को जोड़ने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर यह सियासी ध्रुवीकरण और आरोप-प्रत्यारोप की नई बहस को भी जन्म दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अभियान कितना प्रभाव डालता है और राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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