
Fake Doctor का खौफनाक खेल! कानपुर में ड्राइवर चला रहा था किडनी रैकेट…
Kanpur Kidney Racket Case: कानपुर से सामने आया किडनी ट्रांसप्लांट घोटाला अब एक बड़े मेडिकल माफिया नेटवर्क का रूप ले चुका है। इस मामले में चौंकाने वाला खुलासा यह है कि एक 8वीं पास एंबुलेंस ड्राइवर न सिर्फ खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों की जांच कर रहा था, बल्कि पूरे रैकेट में अहम भूमिका निभा रहा था।
मामला कैसे सामने आया?
इस सनसनीखेज कांड का खुलासा 31 मार्च को हुआ, जब पुलिस ने मसवानपुर स्थित आहूजा हॉस्पिटल में छापा मारा। शुरुआती जांच एक डोनर और दलाल के बीच पैसों के विवाद से शुरू हुई, जिसने धीरे-धीरे एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।
‘फर्जी डॉक्टर’ का खेल
इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला किरदार है:
शिवम अग्रवाल
- पेशा: एंबुलेंस ड्राइवर
- शिक्षा: सिर्फ 8वीं पास
लेकिन हकीकत यह है कि:
- वह खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों की जांच करता था
- एप्रन पहनता और गले में स्टेथेस्कोप रखता था
- विदेशी मरीजों के साथ फोटो खिंचवाकर “इंटरनेशनल डॉक्टर” की छवि बनाता था
पुलिस को उसके मोबाइल से एक तस्वीर मिली, जिसमें वह दक्षिण अफ्रीका की महिला मरीज की जांच करता दिखाई दे रहा है। यह फोटो 3 मार्च को हुए एक ट्रांसप्लांट के दौरान की बताई जा रही है।
विदेशी मरीजों तक फैला नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह रैकेट सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था।
- विदेशी मरीजों को भी टारगेट किया जाता था
- उन्हें भारत लाकर सस्ते में ट्रांसप्लांट का लालच दिया जाता था
- अलग-अलग राज्यों और देशों से मरीज और डोनर जोड़े जाते थे
यह पूरा नेटवर्क भारत से बाहर तक फैला हुआ था, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।
करोड़ों का काला कारोबार
इस अवैध धंधे में मोटी कमाई होती थी:
- गरीब और जरूरतमंद लोगों से किडनी खरीदी जाती: ₹5–10 लाख
- अमीर मरीजों को बेची जाती: ₹50 लाख से ₹1 करोड़ तक
यानी एक ट्रांसप्लांट में ही लाखों-करोड़ों का मुनाफा कमाया जाता था। यह नेटवर्क गरीबी और मजबूरी का फायदा उठाकर चलता था।
कैसे चलता था पूरा रैकेट?
पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तरीके सामने आए:
- दलाल (जैसे शिवम) डोनर और मरीज को जोड़ते थे
- कई अस्पतालों का इस्तेमाल होता था
- एक जगह डोनर, दूसरी जगह रिसीवर, तीसरी जगह ऑपरेशन
- ऑपरेशन के लिए बाहर से डॉक्टर बुलाए जाते थे
- काम पूरा होते ही टीम गायब हो जाती थी
इस तरह पुलिस और प्रशासन की नजर से बचने की पूरी कोशिश की जाती थी।
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अस्पताल और डॉक्टर भी शामिल
इस मामले में कई बड़े नाम सामने आए:
- अस्पताल मालिक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा
- उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा
- दलाल शिवम अग्रवाल
- अन्य स्टाफ और सहयोगी
इन सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ फर्जी डॉक्टर और टेक्नीशियन भी सर्जरी में शामिल थे।
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मरीजों की जान से खिलवाड़
इस पूरे कांड का सबसे खतरनाक पहलू था:
- बिना योग्य डॉक्टरों के ऑपरेशन
- कोई उचित मेडिकल रिकॉर्ड नहीं
- संक्रमण और मौत का खतरा
- मरीजों और डोनर दोनों की जिंदगी जोखिम में
यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जान से खिलवाड़ का मामला है। सतह ही ये चेतावनी है कि अगर सख्ती नहीं बरती गई, तो ऐसे “मेडिकल माफिया” आम लोगों की जिंदगी के साथ खेलते रहेंगे।
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