
‘सपनों की कोई उम्र नहीं’, 60+ कपल की 16,000 किमी की इंटरनेशनल ड्राइव…
Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजधानी Dehradun से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि सपनों को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती। 60 वर्ष की उम्र पार कर चुके राजेंद्र कुमार सिंगल और उनकी पत्नी संगीता सिंगल ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। यह दंपती भारत से यूनाइटेड किंगडम तक करीब 16,000 किलोमीटर की लंबी ओवरलैंड कार यात्रा पर निकल पड़ा है।
सीनियर लिविंग कम्युनिटी से मिली विदाई
शुक्रवार को Dehradun के पुरुकुल क्षेत्र स्थित “अंतारा सीनियर लिविंग” कम्युनिटी से इस साहसिक यात्रा की औपचारिक शुरुआत हुई। यहां मौजूद सह-निवासियों, मित्रों और स्टाफ ने इस दंपती को झंडी दिखाकर रवाना किया। विदाई के दौरान माहौल भावुक भी था और उत्साह से भरा हुआ भी, क्योंकि हर कोई इस अनोखी यात्रा का हिस्सा बनकर गर्व महसूस कर रहा था।
60 की उम्र में भी जिंदा है रोमांच का जुनून
62 वर्षीय राजेंद्र सिंगल और 61 वर्षीय संगीता सिंगल का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि उम्र केवल एक संख्या है। जहां अधिकांश लोग इस उम्र में आरामदायक जीवन की ओर बढ़ते हैं, वहीं इस दंपती ने अपने जीवन के इस पड़ाव को एक नए रोमांच में बदल दिया।
उनका लक्ष्य सिर्फ एक लंबी यात्रा करना नहीं है, बल्कि यह दिखाना भी है कि जीवन के किसी भी चरण में नए सपने देखे और पूरे किए जा सकते हैं।
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16,000 किलोमीटर का चुनौतीपूर्ण सफर
यह यात्रा भारत से शुरू होकर कई देशों से गुजरते हुए यूनाइटेड किंगडम तक पहुंचेगी। करीब 16,000 किलोमीटर लंबा यह सफर आसान नहीं होगा, क्योंकि इसमें अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों, मौसम और सड़क मार्गों की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
फिर भी, इस दंपती का आत्मविश्वास और तैयारी इस बात का संकेत है कि वे हर मुश्किल का डटकर सामना करने के लिए तैयार हैं।
समाज के लिए प्रेरणा
इस यात्रा ने न केवल देहरादून बल्कि पूरे देश में लोगों को प्रेरित किया है। खासकर सीनियर सिटीजन के लिए यह एक संदेश है कि रिटायरमेंट के बाद जीवन खत्म नहीं होता, बल्कि यह एक नई शुरुआत हो सकती है।
उनका यह साहसिक कदम युवाओं के लिए भी एक सीख है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
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हौसला है तो सपने पूरे होंगे
Dehradun के इस दंपती ने यह साबित कर दिया है कि सपनों की कोई उम्र सीमा नहीं होती। 60 साल के बाद भी उन्होंने जिस हिम्मत और जुनून के साथ 16,000 किलोमीटर की यात्रा शुरू की है, वह हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
यह कहानी सिर्फ एक यात्रा की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो कहती है—“जब तक जिंदगी है, तब तक सपने हैं।”
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