जंगल से मिली ‘मोगली गर्ल’ नहीं रही, ब्लड इंफेक्शन ने ली 18 वर्षीय एहसास की जान

UP News: उत्तर प्रदेश के बहराइच के जंगलों से साल 2017 में मिली “मोगली गर्ल” एहसास (पूर्व नाम पूजा) का 18 वर्ष की उम्र में लखनऊ में निधन हो गया। बताया गया है कि उसके फेफड़ों में हुए गंभीर संक्रमण ने रक्त में फैलकर सेप्सिस (ब्लड इंफेक्शन) का रूप ले लिया, जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई। एहसास पिछले नौ वर्षों से लखनऊ के निर्वाण बालगृह में रह रही थी, जहां उसका इलाज, देखभाल और पुनर्वास चल रहा था।

जंगल से मिली थी रहस्यमयी बच्ची
साल 2017 में कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य में ग्रामीणों ने एक बच्ची को बंदरों के झुंड के साथ घूमते देखा था। सूचना मिलने पर वन विभाग और बाल कल्याण समिति ने उसे सुरक्षित बाहर निकाला। उस समय उसकी उम्र करीब 8-10 वर्ष आंकी गई थी। वह सामान्य बच्चों की तरह बोल नहीं पाती थी और हाथ-पैरों के सहारे चलती थी।

शुरुआत में उसे बहराइच के बाल संरक्षण केंद्र में रखा गया, जहां उसका नाम पूजा रखा गया। बाद में बेहतर देखभाल और चिकित्सा सुविधाओं के लिए उसे लखनऊ के निर्वाण बालगृह भेजा गया, जहां उसका नया नाम “एहसास” रखा गया।

धीरे-धीरे सीखी इंसानी दुनिया की बातें
कई वर्षों की देखभाल, चिकित्सा और प्रशिक्षण के बाद एहसास में उल्लेखनीय बदलाव आए। उसने कपड़े पहनना सीखा, लोगों को पहचानना शुरू किया और अपने देखभालकर्ताओं के प्रति भावनात्मक जुड़ाव विकसित किया। बालगृह में उसकी देखभाल करने वाली महिला को वह अपनी “अम्मा” मानती थी और उनके स्नेह पर प्रतिक्रिया भी देती थी।

हालांकि वह कभी पूरी तरह बोलना नहीं सीख सकी, लेकिन उसके व्यवहार में सामाजिक समझ और भावनात्मक अभिव्यक्ति धीरे-धीरे विकसित हुई थी।

जंगल में पले बच्चे बाहरी दुनिया में कठिनाई क्यों झेलते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बच्चों को अक्सर “फेरल चिल्ड्रेन” (Feral Children) कहा जाता है। यदि कोई बच्चा जीवन के शुरुआती वर्षों में मनुष्यों के संपर्क से दूर रहता है, तो उसके मस्तिष्क का भाषा, सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक विकास प्रभावित हो सकता है।

ऐसे बच्चों के सामने मुख्य चुनौतियां होती हैं:

भाषा सीखने में कठिनाई – बचपन के शुरुआती वर्षों में भाषा का संपर्क न मिलने पर बोलना सीखना बेहद मुश्किल हो जाता है।
सामाजिक व्यवहार की कमी – लोगों के साथ रहना, भावनाएं समझना और सामाजिक नियमों को अपनाना कठिन होता है।
कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र – लंबे समय तक असामान्य परिस्थितियों में रहने से शरीर संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है।
मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा – पोषण, शिक्षा और सामाजिक संपर्क की कमी विकास को प्रभावित करती है।

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ब्लड इंफेक्शन कितना खतरनाक होता है?
चिकित्सकों के अनुसार, जब फेफड़ों या शरीर के किसी अन्य हिस्से का संक्रमण रक्त में फैल जाता है, तो उसे सेप्सिस कहा जाता है। यह स्थिति बेहद गंभीर होती है क्योंकि संक्रमण शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।

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एक ऐसी कहानी जो हमेशा याद रहेगी
एहसास की कहानी केवल एक बच्ची की नहीं थी, बल्कि इंसानी संवेदनाओं, पुनर्वास और संघर्ष की कहानी थी। जंगल में मिली एक डरी-सहमी बच्ची ने धीरे-धीरे लोगों के बीच रहना सीखा, रिश्तों को समझा और प्यार महसूस किया। हालांकि उसका सफर 18 साल की उम्र में समाप्त हो गया, लेकिन “मोगली गर्ल” के रूप में उसकी कहानी लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगी।

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