
सर्वसम्मति की मिसाल, Harivansh Narayan Singh को फिर मिला राज्यसभा का भरोसा
Rajya Sabha: संसद के उच्च सदन में एक बार फिर अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार राज्यसभा का उपसभापति निर्विरोध चुना गया है। उनके चयन को सदन में व्यापक समर्थन मिला, जिसे संसदीय सहमति और स्थिरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
निर्विरोध चुनाव, सर्वसम्मति का संदेश
उपसभापति पद के लिए हुए चुनाव में हरिवंश नारायण सिंह के खिलाफ कोई अन्य उम्मीदवार सामने नहीं आया, जिसके चलते उन्हें निर्विरोध चुना गया। यह न सिर्फ उनके अनुभव और कार्यशैली पर भरोसे को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि विभिन्न दलों के बीच इस पद को लेकर सहमति बनी रही।
पीएम मोदी का बयान
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हरिवंश के पुनर्निर्वाचन पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि:
- सदन को उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा है
- उन्होंने हमेशा सभी दलों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है
- भविष्य में भी वे निष्पक्ष और संतुलित भूमिका निभाते रहेंगे
पीएम के इस बयान को सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने की उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है।
कैसे खाली हुआ था पद?
यह पद तब रिक्त हुआ था जब हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा सदस्य के रूप में दूसरा कार्यकाल समाप्त हो गया। इसके बाद प्रक्रिया के तहत उन्हें पुनः सदन में मनोनीत किया गया और फिर उपसभापति पद के लिए चुनाव कराया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में:
- Droupadi Murmu द्वारा उन्हें मनोनीत किया गया
- राज्यसभा अध्यक्ष C. P. Radhakrishnan ने चुनाव की तारीख तय की
हरिवंश नारायण सिंह का राजनीतिक और पत्रकारिता अनुभव
हरिवंश नारायण सिंह का करियर राजनीति के साथ-साथ पत्रकारिता में भी रहा है।
- वे लंबे समय तक एक प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक के संपादक रहे
- बाद में राजनीति में आए और राज्यसभा के सदस्य बने
- उपसभापति के रूप में उनकी कार्यशैली संतुलित और संयमित मानी जाती है
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क्या है उपसभापति की भूमिका?
राज्यसभा उपसभापति की भूमिका बेहद अहम होती है:
- सदन की कार्यवाही का संचालन करना
- अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन चलाना
- नियमों और प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना
- विभिन्न दलों के बीच संतुलन बनाए रखना
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राजनीतिक महत्व
हरिवंश का लगातार तीसरी बार चुना जाना कई संकेत देता है:
- उनके नेतृत्व पर व्यापक भरोसा
- सदन में स्थिरता और निरंतरता
- राजनीतिक दलों के बीच सहयोग का माहौल
राज्यसभा में हरिवंश नारायण सिंह का पुनर्निर्वाचन केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संसदीय लोकतंत्र में सहमति और अनुभव की अहमियत को दर्शाता है। अब यह देखना होगा कि वे अपने तीसरे कार्यकाल में सदन को कितनी प्रभावी और संतुलित दिशा दे पाते हैं।
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