
ईरान-अमेरिका तनाव पर भारत सक्रिय! राजनाथ सिंह ने दिए बड़े संकेत…
Rajnath Singh Germany Visit: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और हालिया संघर्षविराम के बाद भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने बड़ा बयान देकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की संभावित भूमिका के संकेत दिए हैं। जर्मनी दौरे पर पहुंचे राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश की थी और भविष्य में भी शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा, “भारत ने अपनी तरफ से प्रयास किए हैं, लेकिन हर चीज का एक समय होता है। हो सकता है कि कल वह समय आ जाए जब भारत अपनी भूमिका निभाए और उसमें सफलता भी मिले।” उनके इस बयान को पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बढ़ी वैश्विक चिंता
हाल के महीनों में Iran और United States के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों और हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया। हालांकि 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम (सीजफायर) हुआ, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही है।
सीजफायर के बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच लगभग 21 घंटे लंबी बातचीत हुई। इस वार्ता में कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका।
पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किए निभा रहे मध्यस्थ की भूमिका
सूत्रों के मुताबिक Pakistan, Egypt और Turkey लगातार दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित कराने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कूटनीतिक प्रयास के तहत इस्लामाबाद में दोनों पक्षों की आमने-सामने बातचीत संभव हो सकी।
राजनाथ सिंह के बयान ने यह संकेत दिया है कि भारत भी इस संकट को केवल दूर से देखने के बजाय शांति प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी चाहता है। भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में संतुलित विदेश नीति अपनाता रहा है और उसके संबंध अमेरिका तथा ईरान दोनों से मजबूत रहे हैं।
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भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट?
भारत के लिए पश्चिम एशिया बेहद रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है। इसके अलावा लाखों भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं। ऐसे में ईरान-अमेरिका संघर्ष बढ़ने का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत इस संकट में सफल मध्यस्थ की भूमिका निभाता है तो इससे उसकी वैश्विक कूटनीतिक साख और मजबूत हो सकती है।
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दुनिया की नजरें अगली बातचीत पर
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें ईरान और अमेरिका के बीच संभावित अगली वार्ता पर टिकी हैं। कई देशों को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए तनाव कम किया जा सकता है। वहीं राजनाथ सिंह के बयान ने यह बहस भी तेज कर दी है कि आने वाले समय में भारत क्या पश्चिम एशिया की शांति प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाएगा।
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