
जनगणना का नया फॉर्मूला! अब किचन तय करेगा परिवारों की पूरी गिनती…
Uttarakhand News: उत्तराखंड में शुरू हुई जनगणना की प्रक्रिया के पहले चरण में एक अहम बदलाव सामने आया है। इस बार मकान गणना (House Listing) के दौरान परिवारों की संख्या तय करने के लिए “रसोई” को आधार बनाया गया है। यानी एक ही घर में रहने वाले लोग अगर अलग-अलग रसोई का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें अलग परिवार माना जाएगा।
क्या है नया नियम?
जनगणना निदेशालय के अनुसार, परिवार की परिभाषा अब सिर्फ रिश्तों पर नहीं बल्कि “खाने की व्यवस्था” पर आधारित होगी।
- अगर एक ही घर में रहने वाले लोग एक ही रसोई में खाना बनाते और खाते हैं, तो उन्हें एक परिवार माना जाएगा।
- वहीं, अगर उसी घर में अलग-अलग रसोई हैं—जैसे बाप-बेटा अलग खाना बनाते हैं—तो उन्हें अलग-अलग परिवार के रूप में गिना जाएगा।
संयुक्त परिवार पर क्या असर?
जहां दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे एक साथ रहते हैं और एक ही रसोई का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें संयुक्त परिवार माना जाएगा। लेकिन जैसे ही रसोई अलग होती है, परिवार की गिनती भी अलग हो जाएगी।
क्यों किया गया यह बदलाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस नियम का उद्देश्य देश में बदलती पारिवारिक संरचना को बेहतर तरीके से समझना है।
शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण एक ही घर में अलग-अलग यूनिट्स बन रही हैं
आर्थिक और सामाजिक योजनाओं को अधिक सटीक बनाने के लिए परिवारों की वास्तविक संख्या जानना जरूरी है
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लोगों के मन में उठे सवाल
मकान गणना के दौरान कई लोगों के मन में यह सवाल था कि एक ही छत के नीचे रहने वालों को कैसे गिना जाएगा। अब “रसोई आधारित परिभाषा” ने इस भ्रम को काफी हद तक दूर कर दिया है।
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प्रशासन की तैयारी
जनगणना कर्मियों को इस नए नियम के बारे में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे घर-घर जाकर सही जानकारी दर्ज कर सकें। साथ ही लोगों से भी सहयोग की अपील की गई है, ताकि डेटा सटीक और विश्वसनीय हो।
जनगणना के इस नए नियम से परिवार की परिभाषा पहले से ज्यादा स्पष्ट हो गई है। अब सिर्फ एक छत के नीचे रहना ही परिवार नहीं माना जाएगा, बल्कि साथ खाना बनाना और खाना भी उतना ही अहम होगा। इससे सरकार को सामाजिक और आर्थिक योजनाओं को और बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
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