
वाराणसी में बनेगा भूटान का बौद्ध मंदिर और गेस्ट हाउस, लखनऊ में MOU साइन
Varanasi News: यूपी सरकार और भूटान के बीच लखनऊ में MoU साइन हुआ है। वाराणसी के पिंडरा में भूटान सरकार 2 एकड़ जमीन पर बौद्ध मंदिर और गेस्ट हाउस बनाएगी।
Varanasi News: भारत और भूटान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में जल्द ही एक भव्य भूटानी बौद्ध मंदिर और अतिथि गृह (गेस्ट हाउस) का निर्माण होने जा रहा है। इसके लिए यूपी पर्यटन विभाग और रॉयल गवर्नमेंट ऑफ भूटान के बीच राजधानी लखनऊ में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इस ऐतिहासिक समझौते के तहत उत्तर प्रदेश सरकार भूटान को वाराणसी में बौद्ध मंदिर और गेस्ट हाउस बनाने के लिए 2 एकड़ प्राइम लैंड (भूमि) उपलब्ध कराएगी।
₹1 सालाना किराया और 30 साल की लीज
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस साझेदारी को दोनों देशों के ऐतिहासिक कूटनीतिक और धार्मिक संबंधों के लिए एक मील का पत्थर बताया है।
यूपी सरकार ने वाराणसी में इस परिसर के निर्माण के लिए भूटान सरकार को 30 वर्ष की लीज पर भूमि आवंटित की है।दोनों देशों के मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों का सम्मान करते हुए इस जमीन का वार्षिक किराया मात्र ₹1 तय किया गया है। यह जमीन वाराणसी की पिंडरा तहसील, परगना कोलअसला के अजईपुर में स्थित है।
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लखनऊ में हुआ समझौता
भूमि हस्तांतरण से जुड़ी आधिकारिक डीड पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के विशेष सचिव मृदुल चौधरी और भूटान सरकार की प्रतिनिधि व उप प्रमुख मिशन ताशी पेल्डेन ने हस्ताक्षर किए।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर दोनों देशों के कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:
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चिमी वांगमो (मंत्री-परामर्शदाता, वित्त, भूटान)
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उगेन नामग्याल (संयुक्त सचिव, भारत-भूटान मठवासी मामले, सेंट्रल मोनास्टिक बॉडी ऑफ भूटान)
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अमृत अभिजात (अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, यूपी)
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डॉ. वेदपति मिश्रा (महानिदेशक पर्यटन, यूपी)
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बौद्ध पर्यटन (Buddhist Tourism) को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावा
वाराणसी का सारनाथ पहले से ही दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों के लिए सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। पिंडरा के अजईपुर में भूटान सरकार द्वारा मंदिर और इंटरनेशनल गेस्ट हाउस बनाए जाने से वाराणसी के पर्यटन मानचित्र को एक नया आयाम मिलेगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध सर्किट (Buddhist Circuit) मजबूत होगा, बल्कि भूटान और अन्य दक्षिण-एशियाई देशों से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी होगी। इससे स्थानीय रोजगार और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का भी तेजी से विकास होगा।
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