बागियों के सहारे बढ़ेगा कुनबा? जानिए NDA के दो-तिहाई बहुमत का पूरा हिसाब…

Lok Sabha Seats: लोकसभा में भाजपा और एनडीए की ताकत को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) में संभावित टूट की खबरों के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या सत्तारूढ़ गठबंधन संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल कर सकता है।

क्या है दो-तिहाई बहुमत का गणित?
लोकसभा की कुल 543 निर्वाचित सीटों के आधार पर किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ-साथ कुल सदस्य संख्या के आधे से अधिक सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है। राजनीतिक चर्चा में आमतौर पर 362-363 सांसदों का आंकड़ा दो-तिहाई बहुमत के रूप में देखा जाता है।

फिलहाल NDA के पास कितनी ताकत?
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के पास 240 सीटें हैं। वहीं, जेडीयू, टीडीपी, एलजेपी (रामविलास), शिवसेना (शिंदे), आरएलडी और अन्य सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए का आंकड़ा करीब 293 सांसदों तक पहुंचता है।

इस हिसाब से दो-तिहाई बहुमत के लिए आवश्यक 362 सीटों तक पहुंचने के लिए एनडीए को अभी लगभग 69 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

क्या टूट से बदल सकता है समीकरण?
हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) में असंतोष की खबरें सामने आई हैं। यदि कुछ सांसद दल बदलकर या अलग गुट बनाकर एनडीए का समर्थन करते हैं तो निश्चित रूप से गठबंधन की संख्या बढ़ सकती है।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिर्फ कुछ दलों या सांसदों के टूटने से 69 सीटों का अंतर पाटना आसान नहीं होगा। उदाहरण के लिए, यदि शिवसेना (UBT) के 6 सांसद और कुछ अन्य छोटे दलों के सांसद एनडीए के साथ आते भी हैं, तब भी गठबंधन दो-तिहाई बहुमत से काफी दूर रहेगा।

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सपा और आप में टूट की अटकलें
राजनीतिक गलियारों में समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं की नाराजगी को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन अभी तक इन दलों में किसी बड़े विभाजन के ठोस संकेत नहीं मिले हैं। समाजवादी पार्टी ने ऐसी सभी अटकलों को खारिज किया है।

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क्या अभी संभव है 363 का आंकड़ा?
वर्तमान संख्या बल को देखते हुए निकट भविष्य में एनडीए का सीधे 362-363 सीटों तक पहुंचना आसान नहीं दिखता। इसके लिए या तो बड़े पैमाने पर विपक्षी दलों में टूट होनी होगी, या फिर कई क्षेत्रीय दलों को औपचारिक रूप से एनडीए के साथ आना होगा।

फिलहाल भाजपा 240 सीटों और एनडीए लगभग 293 सांसदों के साथ मजबूत स्थिति में जरूर है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा अभी भी काफी दूर नजर आता है। यही वजह है कि संसद के भीतर होने वाली हर राजनीतिक हलचल और दल-बदल की अटकलों पर राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं।

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