
G-7 मंच पर गूंजेगी भारत की आवाज, जिनेवा से एवियन रवाना होंगे PM Modi…
PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूरोप दौरे के तहत स्लोवाकिया की सफल यात्रा पूरी करने के बाद स्विट्जरलैंड की राजधानी जिनेवा पहुंच गए हैं। यहां उनका स्वागत स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति Guy Parmelin ने किया। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब वैश्विक राजनीति, आर्थिक सहयोग और सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर दुनिया की निगाहें आगामी G-7 शिखर सम्मेलन पर टिकी हुई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की सक्रिय कूटनीतिक नीति और वैश्विक मंचों पर उसकी बढ़ती भूमिका का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। जिनेवा पहुंचने के बाद दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों पर हुई चर्चा
जिनेवा में हुई मुलाकात के दौरान भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक, तकनीकी, निवेश और नवाचार से जुड़े सहयोग को और विस्तार देने पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत आर्थिक संबंध रहे हैं और हाल के वर्षों में व्यापार, निवेश तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकती है। भारत और स्विट्जरलैंड जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी मिलकर काम कर रहे हैं।
G-7 शिखर सम्मेलन में भारत की अहम भूमिका
जिनेवा से प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के एवियन क्षेत्र में आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना होंगे। यद्यपि भारत G-7 समूह का सदस्य नहीं है, फिर भी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं भारत को लगातार विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल करती रही हैं।
इस बार भी सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला, भू-राजनीतिक तनाव और विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। भारत इन विषयों पर अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को प्रमुखता से रख सकता है।
वैश्विक मंच पर बढ़ती भारत की भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक कूटनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। G-20 की अध्यक्षता, वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज उठाने और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी के कारण भारत की भूमिका लगातार बढ़ी है।
राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि G-7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी विकासशील देशों के हितों, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक संतुलन जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
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यूरोप दौरे का रणनीतिक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी का यह यूरोपीय दौरा केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करना भी है। स्लोवाकिया के बाद स्विट्जरलैंड और फिर G-7 सम्मेलन में भागीदारी भारत की बहुआयामी विदेश नीति को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोपीय देशों के साथ मजबूत संबंध भारत के आर्थिक और सामरिक हितों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इस दौरे के दौरान होने वाली बैठकों और चर्चाओं पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी हुई है।
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दुनिया की निगाहें G-7 पर
आगामी G-7 शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऊर्जा संकट, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विस्तार, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय संघर्ष जैसे मुद्दे विश्व नेताओं के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हैं।
ऐसे में भारत की भागीदारी और प्रधानमंत्री मोदी के विचार सम्मेलन की चर्चाओं को नई दिशा दे सकते हैं। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और वैश्विक विकास में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
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