‘असली नहीं, रील नेता हैं राहुल’, थरूर की टिप्पणी के बहाने भाजपा का बड़ा हमला

BJP on Rahul Gandhi: कांग्रेस सांसद शशि थरूर की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा ने इस बयान को कांग्रेस के भीतर उभरते वैचारिक मतभेदों का संकेत बताते हुए राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का दावा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और उनके फैसलों की सराहना कर रहे हैं, जबकि राहुल गांधी लगातार सरकार पर हमला बोलने की राजनीति कर रहे हैं।

शनिवार को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी अपनी ही पार्टी के नेताओं को साथ रखने में असफल साबित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर कई नेता राहुल गांधी की राजनीतिक सोच और रणनीति से सहमत नहीं हैं।

शशि थरूर के बयान से शुरू हुआ विवाद
राजनीतिक गलियारों में चर्चा उस समय तेज हो गई जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर अपनाए गए रुख की सराहना की। थरूर की टिप्पणी को भाजपा ने हाथोंहाथ लिया और इसे कांग्रेस के भीतर बदलते माहौल का संकेत बताया।

भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष के कई नेता भी अब यह स्वीकार कर रहे हैं कि वैश्विक मंचों पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है और प्रधानमंत्री मोदी ने कई मुद्दों पर प्रभावी नेतृत्व का परिचय दिया है।

राहुल गांधी पर ‘रील नेता’ वाला तंज
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे जमीनी राजनीति से ज्यादा सोशल मीडिया और प्रतीकात्मक राजनीति पर ध्यान दे रहे हैं।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि राहुल गांधी अब “रील नेता” बनकर रह गए हैं, जबकि देश को वास्तविक नेतृत्व की आवश्यकता है। भाजपा ने दावा किया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी राहुल गांधी की राजनीतिक दिशा को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं।

कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर उठे सवाल
भाजपा के हमले के बाद कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी में विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग राय होना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है और इसे मतभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शशि थरूर हमेशा से स्वतंत्र विचार रखने वाले नेता रहे हैं और उन्होंने कई बार राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर पार्टी लाइन से अलग राय व्यक्त की है।

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भाजपा ने बनाया राजनीतिक मुद्दा
भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस नेतृत्व की कमजोरी से जोड़ते हुए कहा कि राहुल गांधी अपनी पार्टी के भीतर सर्वमान्य नेता नहीं बन पाए हैं। पार्टी का दावा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और राहुल गांधी के बीच कई मुद्दों पर सोच का अंतर साफ दिखाई देता है।

भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि जब विपक्षी दलों के नेता भी प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और नेतृत्व की सराहना कर रहे हैं, तो यह केंद्र सरकार के कामकाज की स्वीकार्यता को दर्शाता है।

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बढ़ सकती है राजनीतिक बयानबाजी
लोकसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक माहौल में भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। ऐसे में शशि थरूर की टिप्पणी और उस पर भाजपा की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे सकती है। यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे कांग्रेस के नेतृत्व, विपक्ष की रणनीति और राष्ट्रीय राजनीति के व्यापक संदर्भ में देखा जाएगा।

फिलहाल भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे व्यक्तिगत राय और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का हिस्सा बता सकती है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर सियासी टकराव और बढ़ने की संभावना है।

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