‘होर्मुज अब पहले जैसा नहीं रहेगा’, अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच तेहरान का बड़ा ऐलान

Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष और अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रमुख भूमिका निभा रहे मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि होर्मुज अब युद्ध से पहले जैसी स्थिति में नहीं रहेगा और इसकी सुरक्षा तथा निगरानी की व्यवस्था को लेकर ईरान अपनी नई रणनीति अपनाएगा।

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई तकनीकी स्तर की वार्ता के पहले दौर के बाद गालिबाफ ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान को अमेरिका पर आज भी भरोसा नहीं है और भविष्य में भी वह पूरी सतर्कता के साथ आगे बढ़ेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच वर्षों पुराने तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।

अमेरिका पर भरोसा नहीं
ईरानी सरकारी मीडिया से बातचीत में गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत का मतलब यह नहीं है कि तेहरान ने उस पर विश्वास करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास ने बार-बार यह साबित किया है कि ईरान को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा स्वयं करनी होगी।

उन्होंने कहा, “हमने कभी अमेरिकियों पर भरोसा नहीं किया, आज भी नहीं करते और भविष्य में भी सावधान रहना ही समझदारी होगी।”

इस बयान को अमेरिका के प्रति ईरान की पारंपरिक नीति और अविश्वास की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।

होर्मुज की अहमियत
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाले इस संकरे रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात होता है।

सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और इराक जैसे देशों का ऊर्जा व्यापार इसी मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह बयान केवल सुरक्षा नीति का संकेत नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लेकर एक रणनीतिक संदेश भी है।

ईरान करेगा अपनी शर्तों पर निगरानी
गालिबाफ ने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सम्मान करता रहेगा, लेकिन होर्मुज की सुरक्षा और गतिविधियों की निगरानी को लेकर उसकी भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।

हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई व्यवस्था में क्या बदलाव होंगे, लेकिन माना जा रहा है कि ईरान इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति और निगरानी क्षमताओं को और बढ़ा सकता है।

ट्रंप के दावे पर ईरान का जवाब
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। ट्रंप ने इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास का संकेत बताया।

लेकिन ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। तेहरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई नई सहमति नहीं बनी है और अमेरिका की ओर से किए जा रहे दावे वास्तविक बातचीत से मेल नहीं खाते।

ईरानी अधिकारियों के अनुसार वार्ता का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था।

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तेल प्रतिबंधों में मिली अस्थायी राहत
स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर लागू कुछ प्रतिबंधों में 60 दिनों की सीमित राहत देने की घोषणा की है। इसे दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मूल मुद्दों पर ठोस समझौता नहीं होता, तब तक अमेरिका और ईरान के रिश्तों में स्थायी सुधार की संभावना सीमित रहेगी।

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दुनिया की नजरें होर्मुज पर
ईरान के ताजा बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिक गई हैं। यदि ईरान इस मार्ग की निगरानी और नियंत्रण को लेकर नई रणनीति लागू करता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों, समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है।

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन दोनों देशों के बयानों से साफ है कि अविश्वास की दीवार अभी भी पूरी तरह नहीं टूटी है। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि यह वार्ता स्थायी समझौते की ओर बढ़ती है या फिर क्षेत्र में तनाव का एक नया दौर शुरू होता है।

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