
Anti-Migrant प्रदर्शन से दक्षिण अफ्रीका में तनाव, विदेशी नागरिकों में बढ़ी चिंता…
Anti-Migrant Protest: दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी-विरोधी आंदोलन (एंटी-इमिग्रेंट प्रोटेस्ट) के चलते मंगलवार को कई शहरों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। अवैध प्रवासियों को देश छोड़ने के लिए दी गई समय-सीमा समाप्त होने के बीच लोगों में हिंसा की आशंका बढ़ गई। कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं, सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं और सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम आवाजाही देखने को मिली। संभावित तनाव को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ मार्च और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसके मद्देनजर आम नागरिकों और विदेशी मूल के लोगों में भय का माहौल बना रहा। विशेष रूप से अन्य अफ्रीकी देशों से आए प्रवासियों ने सुरक्षा कारणों से अपने घरों से बाहर निकलने और काम पर जाने से परहेज किया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के सप्ताहों में बढ़ती हिंसा ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले कुछ हफ्तों के दौरान मोजाम्बिक के दो, इथियोपिया के एक और मलावी के एक नागरिक की हत्या कर दी गई। इन घटनाओं के बाद कई विदेशी नागरिकों ने दक्षिण अफ्रीका छोड़ना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ अफ्रीकी देशों ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए बसों और विमानों की व्यवस्था की है।
देश के प्रमुख आर्थिक केंद्र जोहान्सबर्ग और बंदरगाह शहर डरबन के कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथों में लकड़ी की लाठियां भी देखी गईं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
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इस बीच, इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक जस्टिस (IEJ) ने सरकार से प्रवासियों के खिलाफ हिंसा और नफरत फैलाने वाले बयानों पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। संस्था का कहना है कि देश की आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और सामाजिक चुनौतियों का समाधान खोजने के बजाय कुछ राजनीतिक समूह और स्वयंभू निगरानी दल (विजिलेंट ग्रुप) लोगों की नाराजगी को प्रवासियों के खिलाफ मोड़ रहे हैं, जिससे सामाजिक तनाव और बढ़ रहा है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर केवल सामाजिक सौहार्द पर ही नहीं बल्कि दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों से बचने की अपील कर रहा है, जबकि सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
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