यूरोप में भीषण गर्मी का कहर, AC खरीदने उमड़ी भीड़…जानिए चौंकाने वाली वजह

Europe Heat Wave: यूरोप इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। कई देशों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है, जिससे लोगों के लिए दैनिक जीवन प्रभावित होने लगा है। हालात ऐसे हैं कि सुपरमार्केट और इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर्स में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की मांग अचानक बढ़ गई है।

कई जगहों पर लोग स्टोर खुलते ही कूलिंग उपकरण खरीदने के लिए उमड़ पड़े और सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें लोग AC और पंखे खरीदने के लिए होड़ करते दिखाई दिए।

हालांकि, भारत की तरह यूरोप के अधिकांश घरों में एयर कंडीशनर लगाना इतना आसान नहीं है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें जलवायु, भवन निर्माण की शैली और सरकारी नियम शामिल हैं।

यूरोप में AC की जरूरत क्यों कम पड़ती है?
भारत के विपरीत यूरोप के अधिकांश देशों में साल का बड़ा हिस्सा ठंडे मौसम में गुजरता है। वहां गर्मी का मौसम अपेक्षाकृत छोटा होता है और कई क्षेत्रों में तापमान लंबे समय तक अधिक नहीं रहता। यही वजह है कि पारंपरिक रूप से लोगों ने घरों में हीटिंग सिस्टम पर ज्यादा निवेश किया, जबकि एयर कंडीशनिंग को आवश्यक सुविधा नहीं माना गया।

पुराने भवन और सख्त निर्माण नियम
यूरोप के कई शहरों में सदियों पुराने भवन और ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं। इन भवनों के बाहरी हिस्से में बदलाव करने पर कड़े नियम लागू होते हैं। कई शहरों में इमारत के बाहरी हिस्से पर AC की बाहरी यूनिट लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन या हाउसिंग अथॉरिटी की अनुमति आवश्यक होती है।

विशेष रूप से ऐतिहासिक क्षेत्रों में भवनों की मूल संरचना और सौंदर्य को सुरक्षित रखने के लिए बाहरी यूनिट लगाने पर प्रतिबंध या कड़ी शर्तें लागू रहती हैं।

ऊर्जा और पर्यावरण संबंधी नीतियां
यूरोपीय देश ऊर्जा बचत और कार्बन उत्सर्जन कम करने की नीतियों पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। एयर कंडीशनर बिजली की खपत बढ़ाते हैं, इसलिए कई देशों में ऊर्जा दक्षता मानकों को काफी महत्व दिया जाता है। इसी कारण भवनों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि प्राकृतिक वेंटिलेशन और इन्सुलेशन के जरिए तापमान नियंत्रित रखा जा सके।

यह भी पढ़ें…

एक किताब ने बदली सोच, फिर बदल दी दुनिया…युवाओं के लिए प्रेरणा है Elon Musk की सफलता

छोटे अपार्टमेंट और तकनीकी चुनौतियां
यूरोप के बड़े शहरों में बड़ी संख्या में लोग अपार्टमेंट में रहते हैं। कई पुरानी इमारतों में AC लगाने के लिए आवश्यक बिजली क्षमता, पाइपिंग और वेंटिलेशन व्यवस्था पहले से उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में बाद में एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाना महंगा और तकनीकी रूप से जटिल हो जाता है।

यह भी पढ़ें…

सोवियत संघ के ‘जेम्स बॉन्ड’ और व्लादिमीर पुतिन के करीबी सर्गेई इवानोव का निधन…

हीटवेव के साथ बदल रही सोच
लगातार बढ़ती गर्मी और बार-बार आने वाली हीटवेव के कारण यूरोप में अब एयर कंडीशनिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। कई देशों में नए भवनों में कूलिंग सिस्टम को शामिल किया जा रहा है, जबकि लोग पोर्टेबल AC और अन्य कूलिंग उपकरणों की ओर भी रुख कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यदि यूरोप में गर्मी का प्रकोप इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले वर्षों में वहां भी एयर कंडीशनर उतने ही सामान्य हो सकते हैं, जितने आज भारत और अन्य गर्म देशों में हैं।

यह भी पढ़ें…

Pakistan में बढ़ा सियासी विवाद, ख्वाजा आसिफ के बयान पर PoK सरकार नाराज…

Back to top button