
भारत पर फिर ऊर्जा संकट का खतरा? रणनीतिक तेल भंडार को लेकर बड़ा खुलासा…
Energy Crisis in India: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म अर्न्स्ट एंड यंग (Ernst & Young) की रिपोर्ट के अनुसार, देश के रणनीतिक (Strategic) कच्चे तेल के भंडार में फिलहाल केवल 4.9 दिन यानी लगभग पांच दिन की खपत के बराबर तेल का बैकअप उपलब्ध है। ऐसे में यदि वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होती है, तो भारत को ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विशेषकर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। उस समय कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा, लेकिन भारत ने अपनी सक्रिय कूटनीति और विविध आयात नीति के जरिए 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल और ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित कर घरेलू बाजार में किसी बड़े संकट को नहीं आने दिया।
हालांकि, नई रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि केवल सीमित रणनीतिक तेल भंडार भविष्य में जोखिम पैदा कर सकता है। यदि किसी बड़े भू-राजनीतिक संकट, युद्ध या वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो सीमित भंडार देश की ऊर्जा आवश्यकताओं पर दबाव डाल सकता है। इसी वजह से विशेषज्ञ रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में व्यवधान का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था, परिवहन, उद्योग और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। रणनीतिक तेल भंडार ऐसे समय में आपातकालीन सुरक्षा कवच का काम करता है।
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सरकार पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसके तहत देश के विभिन्न हिस्सों में भूमिगत तेल भंडारण सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। साथ ही कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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फिलहाल भारत के सामने तत्काल ऊर्जा संकट की स्थिति नहीं है, क्योंकि नियमित आयात जारी है। हालांकि, भविष्य की संभावित चुनौतियों को देखते हुए रणनीतिक तेल भंडार का विस्तार, ऊर्जा स्रोतों में विविधता और घरेलू उत्पादन बढ़ाना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। ऐसे कदम भारत को वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संकट जैसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने में मदद करेंगे।
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