
निकाह हलाला पर इलाहाबाद HC सख्त, कहा- धार्मिक प्रथा की आड़ में अपराध बर्दाश्त नहीं
Allahabad High Court On Nikah Halala: अमरोहा के तीन तलाक और हलाला मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक परंपराओं के नाम पर नाबालिग का यौन शोषण।
Allahabad High Court On Nikah Halala: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने हलाला के नाम पर एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण और बाद में सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से घिरी FIR को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसमें विस्तृत आपराधिक जांच की सख्त जरूरत है।
‘परंपरा के नाम पर अपराध सही नहीं’
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि भारत में किसी भी धार्मिक या व्यक्तिगत कानून (Personal Law) का सहारा लेकर आपराधिक कृत्यों को सही नहीं ठहराया जा सकता। यदि किसी परंपरा के नाम पर कोई गंभीर अपराध हुआ है, तो देश का कानून अपना काम करेगा।
डिवीजन बेंच ने कहा कि यह पूरा मामला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत मिलने वाले मूल्यों के खिलाफ है। अदालत ने इन आरोपों को ‘अंतरात्मा को झकझोरने वाला’ करार दिया।
क्या है पूरा मामला? (Amroha Halala Case Details)
यह पूरा मामला अमरोहा जिले के थाना सैदनगली क्षेत्र का है।
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2015 (पहला निकाह): पीड़िता का निकाह महज 15 वर्ष की उम्र में साल 2015 में जबरन कराया गया था।
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2016 (तीन तलाक और पहला हलाला): साल 2016 में उसके पति ने उसे ‘तीन तलाक’ दे दिया। इसके बाद दोबारा शादी करने का झांसा देकर नवंबर 2016 में पीड़िता को जबरन ‘निकाह हलाला’ के लिए विवश किया गया, जिसके दौरान वह नाबालिग थी।
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2017 से 2021 (दूसरा निकाह और फिर तलाक): हलाला के बाद साल 2017 में उसका पति से दोबारा निकाह हुआ। लेकिन साल 2021 में पति ने दूसरी शादी कर ली और पीड़िता को फिर से तलाक दे दिया।
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2025 (गैंगरेप की साजिश): जब पति को अपनी दूसरी पत्नी से कोई संतान नहीं हुई, तो उसने पीड़िता को तीसरी बार अपनाने का झांसा दिया। आरोप है कि पति ने साजिश रचते हुए अपने दो भाइयों के जरिए 19 फरवरी 2025 को हलाला के नाम पर पीड़िता के साथ गैंगरेप करवाया। इस पूरे मामले में कुल 9 लोग आरोपी हैं।
हाईकोर्ट ने की याचिकाएं खारिज
आरोपियों ने कोर्ट का रुख कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CRLP(A) 8465/2026 सहित इससे जुड़ी चार आपराधिक रिट याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि शुरुआती स्तर पर ऐसे गंभीर मामलों की जांच को नहीं रोका जा सकता। इसके साथ ही, आरोपियों को पूर्व में दी गई सभी अंतरिम राहतें भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।





