
फर्जी निकाह पर रोक के लिए वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला, मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में फर्जी निकाह, पहचान छिपाकर विवाह करने और विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में संपत्ति के लालच में होने वाले कथित विवाह के मामलों को देखते हुए छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने निकाह से संबंधित नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। बोर्ड के अनुसार अब प्रदेश में केवल वक्फ बोर्ड से पंजीकृत (रजिस्टर्ड) मौलाना ही निकाह संपन्न करा सकेंगे। इसके साथ ही अंतर-धार्मिक निकाह के मामलों में अतिरिक्त प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बनी रहे।
वक्फ बोर्ड का कहना है कि पिछले कुछ समय से ऐसे मामलों की शिकायतें मिल रही थीं, जिनमें कथित तौर पर गलत पहचान, दस्तावेजों में गड़बड़ी या अन्य अनियमितताओं के आधार पर निकाह कराए गए। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड ने निकाह की प्रक्रिया में अधिक निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
रजिस्टर्ड मौलाना ही करा सकेंगे निकाह
नई व्यवस्था के तहत अब केवल वही मौलाना निकाह पढ़ा सकेंगे, जिनका पंजीकरण छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड में होगा। बोर्ड का मानना है कि इससे निकाह कराने वाले व्यक्तियों की जवाबदेही तय होगी और अनधिकृत या फर्जी तरीके से कराए जाने वाले निकाहों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। पंजीकृत मौलानाओं को निकाह से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
अंतर-धार्मिक निकाह के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया
बोर्ड ने अंतर-धार्मिक निकाह के मामलों में भी विशेष प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों की पहचान, आवश्यक दस्तावेजों और अन्य औपचारिकताओं का सत्यापन किया जाएगा। बोर्ड का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य विवाह प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या दबाव की आशंका को कम करना है।
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शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
वक्फ बोर्ड के अनुसार, हाल के वर्षों में विशेष रूप से आदिवासी इलाकों से ऐसी शिकायतें मिली थीं कि कुछ मामलों में कथित तौर पर संपत्ति या अन्य लाभ के उद्देश्य से विवाह किए गए। इन्हीं शिकायतों के आधार पर बोर्ड ने निकाह की प्रक्रिया में सुधार और निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।
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कानूनी प्रक्रिया रहेगी सर्वोपरि
विशेषज्ञों का कहना है कि विवाह से जुड़े सभी मामलों में भारतीय कानून लागू होता है। यदि कोई अंतर-धार्मिक विवाह विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) या अन्य लागू कानूनों के तहत किया जाता है, तो उसकी प्रक्रिया संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगी। वहीं, वक्फ बोर्ड के निर्देश उसके प्रशासनिक दायरे में आने वाली धार्मिक प्रक्रियाओं से जुड़े बताए जा रहे हैं।
फिलहाल छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड की नई व्यवस्था को लेकर विभिन्न सामाजिक और कानूनी हलकों में चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में इन नियमों के क्रियान्वयन और इनके प्रभाव पर सभी की नजर रहेगी।
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