
Bureaucracy बनी योगी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती? 8 महत्वाकांक्षी योजनाएं अटकीं…
UP Government Scheme: उत्तर प्रदेश में UP Assembly Election 2027 को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो चुकी हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार अपने विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए जनता के बीच जाने की तैयारी में है। लेकिन चुनाव से पहले सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं के अटकने से नई बहस शुरू हो गई है।
आरोप है कि कई योजनाएं नौकरशाही की सुस्ती, विभागीय विवाद और फाइलों की लंबी प्रक्रिया के कारण जमीन पर नहीं उतर पा रही हैं। मामला तब ज्यादा चर्चा में आया, जब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं को स्कूटी देने में हुई देरी पर नाराजगी जताई और कहा कि ‘फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घूमती रहती हैं।’
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना में सबसे ज्यादा देरी
योगी सरकार की रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना सबसे ज्यादा चर्चा में है। बीजेपी ने 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान छात्राओं को स्कूटी देने का वादा किया था। इसके बाद UP Budget 2025-26 में इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
हालांकि, योजना के नियम बनाने में करीब एक साल लग गया। अब 90 प्रतिशत अंक की पात्रता शर्त को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का कहना है कि इस शर्त के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की उन छात्राओं को योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा, जो रोजाना 10 से 12 किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ाई करने जाती हैं। उनका मानना है कि 90 प्रतिशत अंक की शर्त से शहरी और निजी स्कूलों की छात्राओं को ज्यादा फायदा मिल सकता है।
49 बस अड्डों के आधुनिकीकरण की योजना भी अटकी
योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के 49 बस अड्डों के आधुनिकीकरण की योजना बनाई थी। इन बस अड्डों को PPP Model के तहत विकसित किया जाना था।
लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विवाद के कारण टेंडर प्रक्रिया महीनों से अटकी हुई है। परिवहन मंत्री के हस्तक्षेप के बावजूद फाइलों की रफ्तार तेज नहीं हो सकी।
स्थानीय विधायक भी अपने-अपने क्षेत्रों में बस अड्डों का काम शुरू कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। चुनाव से पहले यह योजना सरकार के लिए बड़ा विकास मुद्दा बन सकती थी, लेकिन देरी ने इसे सवालों के घेरे में ला दिया है।
स्मार्टफोन-टैबलेट योजना का लक्ष्य अधूरा
छात्रों और युवाओं के लिए शुरू की गई UP Smartphone Tablet Distribution Scheme भी सरकार के लिए चुनौती बनती दिख रही है।
सरकार ने पांच साल में दो करोड़ छात्रों को स्मार्टफोन और टैबलेट देने का लक्ष्य रखा था। लेकिन चार साल में करीब 60 लाख छात्रों तक ही योजना पहुंच सकी।
टेंडर, खरीद प्रक्रिया और डिवाइस की कीमत तय करने में देरी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सरकार अपने दो करोड़ छात्रों के लक्ष्य को पूरा कर पाएगी?
आउटसोर्स सेवाएं निगम में अब तक भर्ती शुरू नहीं
तीन लाख से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और वेतन व्यवस्था सुधारने के लिए आउटसोर्स सेवाएं निगम बनाया गया था।
निगम बने करीब एक साल हो चुका है, लेकिन अब तक एक भी भर्ती शुरू नहीं हुई है। कर्मचारियों को 16 हजार रुपये न्यूनतम मानदेय देने का वादा भी अधूरा है।
आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ा यह मुद्दा सीधे रोजगार और वेतन से जुड़ा है। ऐसे में चुनाव से पहले इस योजना की धीमी रफ्तार सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
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UP Startup Mission भी फाइलों में उलझा
उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए UP Startup Mission की योजना बनाई गई थी। हालांकि, यह मिशन करीब दो साल तक फाइलों में अटका रहा।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद भी इसकी शुरुआत की तारीख तय नहीं हो सकी है। सरकार युवाओं को रोजगार देने वाला बनाने की बात करती है, लेकिन Startup Mission की धीमी शुरुआत पर सवाल उठ रहे हैं।
Family ID Scheme का इंतजार खत्म नहीं
योगी सरकार की Family ID Scheme का उद्देश्य हर परिवार के एक सदस्य को रोजगार से जोड़ना था।
इस योजना के जरिए परिवारों की आर्थिक स्थिति और रोजगार से जुड़ी जानकारी जुटाकर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने की योजना थी। लेकिन अब तक यह योजना पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाई है।
Labour Adda Scheme सिर्फ 6 शहरों तक सीमित
मजदूरों को रोजगार से जोड़ने के लिए Labour Adda Scheme को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने की योजना थी।
लेकिन एक साल बाद भी यह योजना सिर्फ छह शहरों तक सीमित है। सरकार के बड़े लक्ष्य और जमीनी प्रगति के बीच का अंतर अब सवाल खड़े कर रहा है।
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दूसरे Ground Breaking Ceremony की तारीख तय नहीं
उत्तर प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए प्रस्तावित दूसरा Ground Breaking Ceremony भी मुख्यमंत्री की तारीख तय होने का इंतजार कर रहा है।
सरकार लगातार निवेश और औद्योगिक विकास को अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनाती रही है। ऐसे में इस आयोजन में देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष का आरोप- घोषणाएं तेज, अमल धीमा
इन योजनाओं को लेकर विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार बड़े-बड़े ऐलान करती है, लेकिन योजनाओं को लागू करने की रफ्तार बेहद धीमी है।
विपक्ष UP Election 2027 में इन योजनाओं को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। खासकर छात्राओं, युवाओं, मजदूरों और आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे सरकार के खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
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योगी सरकार के सामने अब समय की चुनौती
सरकार का कहना है कि सभी योजनाओं पर काम जारी है और जल्द ही इनके परिणाम दिखाई देंगे। लेकिन 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अब सरकार के पास ज्यादा समय नहीं बचा है।
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना, 49 बस अड्डों का आधुनिकीकरण, स्मार्टफोन-टैबलेट वितरण, आउटसोर्स सेवाएं निगम, UP Startup Mission, Family ID, Labour Adda और Ground Breaking Ceremony—इन 8 योजनाओं की धीमी रफ्तार अब योगी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या योगी सरकार 2027 चुनाव से पहले इन योजनाओं को जमीन पर उतार पाएगी, या फिर नौकरशाही की धीमी रफ्तार बीजेपी के लिए चुनावी परेशानी बन जाएगी?
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