हॉकी विश्व कप से पहले जर्सी विवाद, नीले की जगह भगवा रंग पर छिड़ी बहस…

Hockey WC: आगामी पुरुष और महिला हॉकी विश्व कप से पहले भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर विवाद गहरा गया है। हॉकी इंडिया द्वारा पारंपरिक नीली जर्सी की जगह ऑरेंज (नारंगी) रंग की नई जर्सी लॉन्च किए जाने के बाद पूर्व भारतीय कप्तान वीरेन रासक्विन्हा ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भारतीय हॉकी की पहचान वर्षों से नीली जर्सी रही है और इसे बदलना टीम की विरासत से समझौता करने जैसा है। वहीं, हॉकी इंडिया ने इस फैसले को पूरी तरह तकनीकी और खेल संबंधी आवश्यकता बताते हुए विवाद को बेवजह बताया है।

दशकों पुरानी पहचान पर छिड़ी बहस
भारतीय हॉकी टीम लंबे समय से नीली जर्सी में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलती रही है। यही वजह है कि नीला रंग भारतीय हॉकी की पहचान बन चुका है। विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट से ठीक पहले नई ऑरेंज जर्सी के अनावरण के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई खेल प्रेमियों ने इसे टीम की पारंपरिक पहचान से जुड़ा मुद्दा बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे आधुनिक बदलाव के रूप में देखा।

पूर्व कप्तान ने जताई नाराजगी
पूर्व भारतीय कप्तान वीरेन रासक्विन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हॉकी इंडिया ने पिछले कुछ वर्षों में कई अच्छे काम किए हैं, लेकिन जर्सी का रंग बदलने का फैसला उन्हें समझ नहीं आया। उन्होंने लिखा कि भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा नीली जर्सी रही है। उन्होंने स्वयं कई वर्षों तक उसी जर्सी में देश का प्रतिनिधित्व किया और उनका मानना है कि प्रशंसक भी भारतीय टीम को नीले रंग में ही देखना पसंद करते हैं।

रासक्विन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका सवाल किसी राजनीतिक संदर्भ में नहीं, बल्कि केवल भारतीय हॉकी की परंपरा, इतिहास और पहचान को लेकर है।

हॉकी इंडिया ने रखा अपना पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने सफाई देते हुए कहा कि नई जर्सी का रंग खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के सुझाव पर चुना गया है। उन्होंने बताया कि आधुनिक हॉकी नीले रंग के टर्फ पर खेली जाती है और उसी रंग की जर्सी पहनने पर कई बार खिलाड़ियों की पहचान और दृश्यता प्रभावित होती है।

टिर्की के अनुसार, ऑरेंज रंग मैदान पर अधिक स्पष्ट दिखाई देता है, जिससे खिलाड़ियों, मैच अधिकारियों और दर्शकों को भी उन्हें पहचानने में सुविधा होती है। उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह खेल प्रदर्शन और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

यह भी पढ़ें…

FIH Pro League: भारत ने पाकिस्तान को फिर धोया, तीन दिन में दूसरी बार हराया

सोशल मीडिया पर बंटी राय
नई जर्सी को लेकर सोशल मीडिया पर समर्थक और विरोधी दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ प्रशंसकों का कहना है कि खेल में समय-समय पर बदलाव स्वाभाविक हैं और यदि इससे खिलाड़ियों को फायदा मिलता है तो इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। वहीं, कई लोगों का मानना है कि टीम की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

खेल विशेषज्ञों का भी मानना है कि विश्व स्तर पर कई टीमें परिस्थितियों और तकनीकी जरूरतों के अनुसार अपनी जर्सी के रंग और डिजाइन में बदलाव करती रही हैं। हालांकि, ऐसे बदलावों के दौरान टीम की ऐतिहासिक पहचान और प्रशंसकों की भावनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें…

FIH Nations Cup: भारत की बेटियों ने रचा इतिहास, न्यूजीलैंड को हराकर बनीं हॉकी चैंपियन

विश्व कप में नई पहचान के साथ उतरेगा भारत
भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें आगामी विश्व कप में पहली बार ऑरेंज जर्सी पहनकर मैदान में उतरेंगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव केवल एक नई किट तक सीमित रहता है या भविष्य में भारतीय हॉकी की नई पहचान बन जाता है। फिलहाल इस फैसले ने खेल जगत में परंपरा, तकनीकी आवश्यकता और टीम की ब्रांड पहचान को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

यह भी पढ़ें…

Hockey Final: हॉकी टीम पर पैसों की बारिश, कोरिया को हराकर जीता हॉकी वर्ल्ड कप का टिकट

Back to top button