
UP Election में तीसरे मोर्चे की दस्तक! चंद्रशेखर आजाद ने उतारे 45 उम्मीदवार…
ASP in UP: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बड़ा चुनावी दांव चलते हुए 45 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इसके साथ ही पार्टी ने प्रदेश में चुनावी अभियान का औपचारिक आगाज कर दिया है।
पार्टी की रणनीति बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संगठनात्मक मॉडल से मिलती-जुलती नजर आ रही है। उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही 45 प्रभारियों की भी नियुक्ति की गई है। पार्टी ने साफ किया है कि जिन नेताओं को प्रभारी बनाया गया है, वही संबंधित सीटों से चुनाव लड़ेंगे।
माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष @BhimArmyChief नगीना से लोकप्रिय सांसद भाई चन्द्र शेखर आजाद जी के निर्देश एवं प्रदेश कमेटी की संस्तुति पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 की तैयारियों के दृष्टिगत निम्नलिखित विधानसभा क्षेत्रों हेतु प्रभारियों की नियुक्ति की जाती है।
नवनियुक्त सभी… pic.twitter.com/XsbUyhvWH2
— Aazad Samaj Party – Uttar Pradesh (@ASP4UP) July 31, 2026
पश्चिमी यूपी पर खास फोकस
पहली सूची में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों को विशेष महत्व दिया गया है। शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, अलीगढ़, लखनऊ और आसपास के जिलों की कई महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए गए हैं। माना जा रहा है कि पार्टी दलित, पिछड़ा और मुस्लिम वोट बैंक को साधने की रणनीति के तहत इन इलाकों पर अधिक ध्यान दे रही है।
इन सीटों पर उम्मीदवार घोषित
घोषित उम्मीदवारों में शामली जिले की थानाभवन सीट से मो. मौसम राव, मुजफ्फरनगर की चरथावल सीट से चौधरी रंजनवीर, मेरठ की किठौर सीट से बाबर चौहान, मेरठ कैंट से संजीव पाल, मेरठ शहर से बदर अली और हापुड़ विधानसभा सीट से वीरेंद्र शिरीष को चुनाव मैदान में उतारा गया है। अन्य जिलों के उम्मीदवारों की सूची भी पार्टी ने जारी कर दी है।
बसपा की रणनीति पर चलती दिखी आसपा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए बसपा की पुरानी रणनीति अपना रहे हैं। प्रभारी और प्रत्याशी एक ही व्यक्ति रखने से संगठन और चुनावी प्रबंधन दोनों में तालमेल बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
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दलित राजनीति में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक को लेकर बसपा, समाजवादी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस पहले से सक्रिय हैं। ऐसे में आजाद समाज पार्टी की ओर से समय रहते उम्मीदवारों की घोषणा को दलित राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश माना जा रहा है। इससे कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय होने की संभावना भी बढ़ सकती है।
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2027 की रणनीति पर बड़ा संकेत
चंद्रशेखर आजाद लगातार प्रदेशभर में जनसभाएं और संगठन विस्तार अभियान चला रहे हैं। पहली सूची जारी कर उन्होंने यह संकेत भी दे दिया है कि पार्टी इस बार सीमित सीटों तक सिमटने के बजाय व्यापक स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। आने वाले दिनों में अन्य विधानसभा सीटों के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा होने की संभावना है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उम्मीदवारों की समय से घोषणा कर आजाद समाज पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी के लिए पर्याप्त समय देना चाहती है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि अन्य प्रमुख दल अपनी पहली सूची कब जारी करते हैं और चुनावी मुकाबला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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