योगी सरकार को मायावती का समर्थन… संत रविदास नगर के मुद्दे पर घिरें अखिलेश

UP News: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच दलित राजनीति एक बार फिर केंद्र में आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भदोही जिले का नाम दोबारा ‘संत रविदास नगर’ किए जाने के फैसले ने प्रदेश की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। इस फैसले का सबसे बड़ा राजनीतिक असर तब देखने को मिला, जब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने खुलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्णय का स्वागत किया। वहीं, समाजवादी पार्टी पर दलित समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने अखिलेश यादव को निशाने पर लिया।

योगी सरकार के फैसले से गदगद हुई मायावती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में घोषणा की कि भदोही जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर किया जाएगा। यह वही नाम है, जिसे बसपा सरकार के दौरान रखा गया था। बाद में समाजवादी पार्टी की सरकार ने जिले का नाम फिर से भदोही कर दिया था। अब योगी सरकार के फैसले पर मायावती ने इसे संत रविदास के सम्मान और दलित समाज की भावनाओं से जुड़ा कदम बताते हुए स्वागत किया है।

सपा पर साधा सीधा निशाना
मायावती ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि दलित हितों की बात करने वाली पार्टी ने सत्ता में रहते हुए ही संत रविदास के नाम को हटाने का काम किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का दलित प्रेम केवल चुनावी नारों तक सीमित है, जबकि उसके फैसले दलित समाज की भावनाओं के विपरीत रहे हैं।

मायावती के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान की काट के रूप में भी देख रहे हैं।

चुनाव से पहले बदली सियासी तस्वीर
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। भाजपा लगातार दलित समाज से जुड़े प्रतीकों और महापुरुषों को सम्मान देने वाले फैसलों को प्रमुखता दे रही है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी पीडीए रणनीति के जरिए सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में मायावती का योगी सरकार के फैसले का समर्थन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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दलित वोट बैंक पर बढ़ी राजनीतिक जंग
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भदोही का नाम बदलने का मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। भाजपा इसे संत रविदास के सम्मान का विषय बता रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी राजनीति से जोड़कर देख रहा है।

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आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है सियासत
मायावती के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर क्या जवाब देती है और भाजपा इस फैसले को चुनावी अभियान में किस तरह इस्तेमाल करती है। फिलहाल इतना तय है कि संत रविदास नगर का मुद्दा आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में प्रमुख चर्चा का विषय बना रहेगा।

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