
रेल यात्रियों के लिए अलर्ट! यात्रा से पहले जरूर देखें लिस्ट… सैकड़ों ट्रेनें रद्द और डायवर्ट
Train Cancelled News: अगर आप सितंबर के अंतिम सप्ताह या अक्टूबर की शुरुआत में ट्रेन से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय रेलवे ने घोषणा की है कि 21 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक बिहार के मोकामा के पास गंगा नदी पर बने नए डबल लाइन रेल पुल को मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए बड़े स्तर पर तकनीकी कार्य किया जाएगा। इस दौरान नॉन-इंटरलॉकिंग (NI) कार्य के कारण देशभर में 845 ट्रेन सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इनमें सैकड़ों ट्रेनें रद्द होंगी, कई ट्रेनों का मार्ग बदला जाएगा और कुछ ट्रेनों का संचालन आंशिक रूप से किया जाएगा।
14 दिनों तक चलेगा मेगा रेल ब्लॉक
पूर्व मध्य रेलवे के अनुसार यह नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य लगातार 14 दिनों तक चलेगा। इस दौरान रेलवे के सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रैक कनेक्टिविटी और नए पुल को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम किया जाएगा। यह परियोजना पूर्वी भारत के रेल नेटवर्क को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ट्रेनों के संचालन में व्यापक बदलाव किए जाएंगे, ताकि निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।
338 ट्रेनें रहेंगी पूरी तरह रद्द
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सरस्वती चंद्र ने बताया कि इस अवधि में कुल 338 ट्रेनें पूरी तरह रद्द रहेंगी। इसके अलावा:
- 384 ट्रेनों का मार्ग (रूट) बदला जाएगा।
- 56 ट्रेनों को बीच रास्ते में ही समाप्त कर दिया जाएगा, यानी वे अपने अंतिम गंतव्य तक नहीं जाएंगी।
- 67 ट्रेनें अपने निर्धारित प्रारंभिक स्टेशन से नहीं चलेंगी, बल्कि बीच के किसी स्टेशन से उनका संचालन शुरू किया जाएगा।
रेलवे ने कहा है कि प्रभावित ट्रेनों की विस्तृत सूची अलग से जारी की जाएगी, ताकि यात्रियों को पहले से जानकारी मिल सके।
क्यों किया जा रहा है यह बड़ा कार्य?
रेलवे के अनुसार मोकामा के पास गंगा नदी पर नया डबल लाइन रेल पुल तैयार हो चुका है। अब इस पुल को मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जोड़ने का अंतिम चरण शुरू किया जा रहा है। इसके लिए अपर हाथीदह जंक्शन, ताल जंक्शन, रामपुर डुमरा, दिनकर ग्राम सिमरिया और बरौनी जंक्शन को नए रेल पुल से जोड़ा जाएगा।
यह कार्य पूरा होने के बाद इस पूरे सेक्शन में रेल यातायात अधिक सुगम, तेज और सुरक्षित हो जाएगा।
पुराना पुल अब क्षमता से ज्यादा व्यस्त
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में गंगा नदी पर बना पुराना रेल पुल सिंगल लाइन वाला है। वर्षों से उसी पुल के माध्यम से बड़ी संख्या में ट्रेनें संचालित की जा रही हैं, जिससे इस मार्ग पर ट्रेनों का दबाव लगातार बढ़ता गया है।
तकनीकी कारणों से पुराने पुल को डबल लाइन में परिवर्तित करना संभव नहीं था। इसी वजह से रेलवे ने उसके समानांतर नया डबल लाइन रेल पुल बनाया है। इसके चालू होने के बाद इस मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी और भविष्य में ट्रेनों की संख्या बढ़ाने में भी सुविधा मिलेगी।
यात्रियों को मिलेगी बेहतर सुविधा
रेलवे का कहना है कि नए डबल लाइन पुल के चालू होने से न केवल ट्रेनों की गति में सुधार होगा, बल्कि ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी। मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगा। इससे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित कई राज्यों के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा।
रेलवे का मानना है कि यह परियोजना भविष्य की बढ़ती रेल यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और इसके पूरा होने से पूरे पूर्वी रेलवे नेटवर्क को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
यह भी पढ़ें…
नाश्ते पर NDA सांसदों से मिले पीएम मोदी, दिल्ली को लेकर दी ये खास चेतावनी…
यात्रा से पहले जरूर जांचें ट्रेन का स्टेटस
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि 21 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच यात्रा करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति अवश्य जांच लें। जिन ट्रेनों का रूट बदला गया है या जिन्हें रद्द किया गया है, उनकी जानकारी रेलवे के आधिकारिक प्लेटफॉर्म और रेलवे हेल्पलाइन पर उपलब्ध कराई जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि यात्रा की योजना बनाने से पहले ट्रेन का समय, मार्ग और संचालन की स्थिति की पुष्टि कर लेने से यात्रियों को अनावश्यक परेशानी से बचने में मदद मिलेगी।
यह भी पढ़ें…
E20 पेट्रोल के विरोध में केजरीवाल का PM हाउस तक मार्च, पुलिस ने रोका तो सड़क पर ही बैठे पूर्व CM
रेल नेटवर्क को मिलेगा बड़ा फायदा
रेलवे का यह नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य अल्पकालिक असुविधा जरूर पैदा करेगा, लेकिन इसके पूरा होने के बाद मोकामा-बरौनी रेलखंड पर परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। नया डबल लाइन रेल पुल चालू होने से ट्रेनों की समयबद्धता बेहतर होगी, परिचालन अधिक सुरक्षित बनेगा और भविष्य में इस मार्ग पर बढ़ते रेल यातायात को आसानी से संभाला जा सकेगा। यही कारण है कि रेलवे इस परियोजना को पूर्वी भारत की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल कर रहा है।
यह भी पढ़ें…





