‘रोल मॉडल से ऐसी उम्मीद नहीं थी’… विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने हंगामे पर जताई नाराजगी

UP VS Monsoon Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान हुए जोरदार हंगामे को लेकर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त की है। सदन की कार्यवाही के दौरान उत्पन्न स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जिन सदस्यों को विधानसभा में आदर्श और रोल मॉडल के रूप में देखा जाता था, उन्हीं के व्यवहार ने उन्हें सबसे अधिक निराश किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

‘रोल मॉडल से ऐसी उम्मीद नहीं थी’
सतीश महाना ने कहा कि विधानसभा केवल राजनीतिक बहस का मंच नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय मर्यादाओं का प्रतीक है। ऐसे में वरिष्ठ और अनुभवी जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आचरण से नए विधायकों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें।

उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को सदन में एक रोल मॉडल माना जाता था, उसी द्वारा हंगामा करना बेहद निराशाजनक रहा। उनके अनुसार इस तरह की घटनाएं विधानसभा की गरिमा को प्रभावित करती हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि पर भी असर डालती हैं।

हंगामा रोकने की कोशिश, लेकिन नहीं बनी बात
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि कार्यवाही के दौरान लगातार प्रयास किए गए कि सदस्य शांत हो जाएं और चर्चा लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़े। उन्होंने कई बार सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और नियमों का पालन करने की अपील भी की, लेकिन इसके बावजूद हंगामा जारी रहा।

उन्होंने कहा कि सदन में किसी भी मुद्दे पर तीखी बहस हो सकती है, लेकिन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना हर सदस्य की जिम्मेदारी है। यदि व्यवस्था भंग होती है तो उसका असर पूरे सदन की कार्यवाही पर पड़ता है।

सदन के बाहर की भाषा पर भी जताई आपत्ति
सतीश महाना ने केवल सदन के भीतर हुए घटनाक्रम पर ही नहीं, बल्कि सदन के बाहर कुछ नेताओं द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर भी कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधियों की भाषा संयमित और मर्यादित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियां या अमर्यादित भाषा किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं मानी जा सकती। ऐसी भाषा लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा को कम करती है।

‘सदन के नेता का सम्मान होना चाहिए’
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन में सरकार और विपक्ष दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सभी सदस्यों और सदन के नेताओं का सम्मान बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि का दायित्व है।

उन्होंने कहा, “सहमति और असहमति लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन सदन के सदस्य का सम्मान होना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था संवाद और मर्यादा से चलती है, टकराव और अव्यवस्था से नहीं।”

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‘कल की घटना से मुझे दुख हुआ’
सतीश महाना ने स्वीकार किया कि विधानसभा में जो कुछ हुआ, उससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और वे चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने सभी दलों के विधायकों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संसदीय परंपराओं का सम्मान करें और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप जिम्मेदार व्यवहार करें।

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लोकतांत्रिक मर्यादाओं को बनाए रखने की अपील
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा देश की सबसे बड़ी विधानसभाओं में से एक है और यहां की कार्यवाही पूरे देश के लिए उदाहरण मानी जाती है। ऐसे में प्रत्येक विधायक की जिम्मेदारी है कि वह अपनी भूमिका का निर्वहन गरिमा, अनुशासन और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप करे।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में सभी राजनीतिक दल सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करेंगे, ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहे।

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