
युवा आंदोलन के बाद भी नहीं बदले तेवर? संसद में सरकार-विपक्ष का गतिरोध जारी…
Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र 2026 अपने दूसरे सप्ताह के बाद भी लगातार राजनीतिक टकराव का गवाह बना हुआ है। 20 जुलाई से 7 अगस्त के बीच लोकसभा में छह और राज्यसभा में दो बिल पारित हुए हैं। संसद के कामकाज और विधायी प्रक्रिया को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पर्याप्त चर्चा और बहस के बिना जल्दबाजी में पारित करा रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि विपक्ष सदन की कार्यवाही में भाग लेने के बजाय लगातार हंगामा कर रहा है।
कुछ ही मिनटों में बिल पास कराने का आरोप
विपक्षी दलों का कहना है कि संसद में विधेयकों पर विस्तृत चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। उनका आरोप है कि लगातार व्यवधान के बीच सरकार विधेयकों को बिना पर्याप्त बहस के पारित करा रही है। हाल के दिनों में कुछ विधेयक विपक्षी विरोध के बीच पारित किए गए। 31 जुलाई को Births and Deaths Amendment Bill भी लोकसभा में हंगामे के बीच बिना बहस के पारित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
विपक्ष इसे संसद की परंपराओं और संसदीय जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि विधेयकों के प्रावधानों पर सांसदों को अपनी बात रखने और उनमें जरूरी संशोधन सुझाने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
सरकार बोली- विपक्ष चर्चा नहीं करना चाहता
दूसरी ओर, सरकार विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कह रही है कि सदन में कामकाज चलाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि सभी सांसदों की है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 7 अगस्त को कहा कि संसद काम कर रही है और विधेयक पारित हो रहे हैं।
सरकार का आरोप है कि विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय सदन के वेल में आकर नारेबाजी और हंगामा कर रहा है। सरकार का तर्क है कि यदि विपक्ष सदन चलने दे तो विधेयकों पर चर्चा भी की जा सकती है और सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब भी दे सकती है।
युवा आंदोलन के बाद भी नहीं बदला सरकार का रुख?
वरिष्ठ पत्रकार और भास्कर समूह के पूर्व राष्ट्रीय राजनीतिक संपादक हेमंत अत्री के मुताबिक, मौजूदा टकराव आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है। उनका मानना है कि सरकार पिछले दो सप्ताह में जिस तरीके से विधेयकों को आगे बढ़ा रही है, उससे संकेत मिलता है कि वह अपने मौजूदा रुख में बदलाव के लिए तैयार नहीं है।
अत्री के मुताबिक, हाल में हुए युवा आंदोलन के बावजूद सरकार के तेवर में बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। उनका आकलन है कि यही स्थिति संसद में सरकार और विपक्ष के बीच जारी स्टैंडऑफ को और लंबा कर सकती है।
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संसद में लगातार बढ़ रहा गतिरोध
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रहा है। इनमें युवा आंदोलन, परीक्षा और पेपर लीक से जुड़े मुद्दे तथा सरकार की विधायी प्राथमिकताएं प्रमुख हैं। कई मौकों पर विरोध प्रदर्शन के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है। 7 अगस्त को भी दोनों सदनों में गतिरोध जारी रहा और कार्यवाही बाधित हुई।
इस बीच सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है। PRS के सत्र ट्रैकर के अनुसार 7 अगस्त तक मानसून सत्र में कई विधेयक संसद के अलग-अलग सदनों से पारित हो चुके थे, जिनमें Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 भी शामिल है।
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अगले दिनों में क्या होगा?
अब नजर मानसून सत्र के बचे हुए दिनों पर है। एक तरफ सरकार लंबित विधेयकों को जल्द से जल्द पारित कराने की कोशिश में है, वहीं विपक्ष पर्याप्त चर्चा और संसदीय जांच की मांग पर कायम है। ऐसे में यदि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहते हैं तो संसद के बाकी दिनों में भी हंगामा और स्थगन देखने को मिल सकता है।
मौजूदा स्थिति यह संकेत दे रही है कि मानसून सत्र सिर्फ विधेयकों के पारित होने तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि यह सरकार और विपक्ष के बीच संसदीय प्रक्रिया, चर्चा और जवाबदेही को लेकर बड़े राजनीतिक टकराव का मंच भी बन चुका है।
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